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सकारात्मक संबंध बढ़ाते हैं उत्पादकता

3 वर्ष पहले
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शोध बताते हैं कि कार्यस्थल पर साथियों से सकारात्मक रिश्तों के होने से अपना काम ज्यादा अच्छा लगने लगता है। लेकिन इसके लिए उद्देश्यपूर्ण और व्यवस्थित होना पड़ता है। अपने साथियों के साथ मिलकर एक सोशल इवेंट की व्यवस्था कर सकते हैं, जिससे एक दूसरे को बेहतर समझ सकें। साथियों के बारे में जो नहीं जानते हैं वो जानने की कोशिश भी की जा सकती है। जैसे, वो क्या है जो उन्हें प्रेरणा देता है? क्यों उन्होंने ये संस्थान चुना? भविष्य में क्या हासिल करना चाहते हैं? ये जानने के लिए अलग से कुछ समय निकाल सकते हैं।

(स्रोत: टू फाइंड मीनिंग इन युअर वर्क, चेंज हाउ यू थिंक अबाउट इट, जॉन कॉलेमन)



कार्यस्थल पर साथियों से सकारात्मक रिश्ते बनाने के लिए क्या प्रय| करने चाहिए ये जानते हैं हार्वर्ड बिज़नेस रिव्यू से।

साथियों से सकारात्मक संबंध होना फायदेमंद

साथियों से सकारात्मक संबंध होना फायदेमंद

शोध बताते हैं कि कार्यस्थल पर साथियों से सकारात्मक रिश्तों के होने से अपना काम ज्यादा अच्छा लगने लगता है। लेकिन इसके लिए उद्देश्यपूर्ण और व्यवस्थित होना पड़ता है। अपने साथियों के साथ मिलकर एक सोशल इवेंट की व्यवस्था कर सकते हैं, जिससे एक दूसरे को बेहतर समझ सकें। साथियों के बारे में जो नहीं जानते हैं वो जानने की कोशिश भी की जा सकती है। जैसे, वो क्या है जो उन्हें प्रेरणा देता है? क्यों उन्होंने ये संस्थान चुना? भविष्य में क्या हासिल करना चाहते हैं? ये जानने के लिए अलग से कुछ समय निकाल सकते हैं।

(स्रोत: टू फाइंड मीनिंग इन युअर वर्क, चेंज हाउ यू थिंक अबाउट इट, जॉन कॉलेमन)

भावनाएं तब जाहिर करें जब खुद पर हो भरोसा

भावनाएं तब जाहिर करें जब खुद पर हो भरोसा

किसी साथी से असहमती बढ़ जाए और वो बहस में तब्दील होने लगे तो हर तरह की भावनाएं उभरती हैं। जैसे गुस्सा, उदासी, निराशा। लेकिन जो महसूस करते हैं, उसे जाहिर करना कई बातों पर निर्भर करता है। यदि आप बुरा महसूस कर रहे हैं और बदले की भावना भी है, तो सबसे पहले खुद को शांत रखने की कोशिश करें। अगर भावना ठंडी है और आप स्थिति संभालकर उसे अपने बस में कर सकते हैं, तो उसे जाहिर किया जा सकता है। लेकिन केवल भावना के बारे में ही बात नहीं करनी है, बल्कि ये भी बताना जरूरी है कि ये भावना पैदा हो क्यों रही है।

(स्रोत: शुड यू शेयर युअर फीलिंग्स ड्यूरिंग अ वर्क कॉन्फ्लिक्ट, सुजैन डेविड)

किसी साथी से असहमती बढ़ जाए और वो बहस में तब्दील होने लगे तो हर तरह की भावनाएं उभरती हैं। जैसे गुस्सा, उदासी, निराशा। लेकिन जो महसूस करते हैं, उसे जाहिर करना कई बातों पर निर्भर करता है। यदि आप बुरा महसूस कर रहे हैं और बदले की भावना भी है, तो सबसे पहले खुद को शांत रखने की कोशिश करें। अगर भावना ठंडी है और आप स्थिति संभालकर उसे अपने बस में कर सकते हैं, तो उसे जाहिर किया जा सकता है। लेकिन केवल भावना के बारे में ही बात नहीं करनी है, बल्कि ये भी बताना जरूरी है कि ये भावना पैदा हो क्यों रही है।

(स्रोत: शुड यू शेयर युअर फीलिंग्स ड्यूरिंग अ वर्क कॉन्फ्लिक्ट, सुजैन डेविड)

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, बांसवाड़ा, रविवार, 20 मई, 2018

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