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राम से मिलना है तो उनके चरित्र का अनुसरण जरूरी: तरुण मुरारी बापू

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा

शहर के कुशलबाग मैदान में भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव और श्रीमारुति महायज्ञ में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। पुरुषोत्तम मास और ग्रीष्मकालीन अवकाश के कारण लोगों का भी इस उत्सव में अधिक उत्साह देखा जा रहा है। शनिवार को कथास्थल पर शहर सहित आसपास के गांव, पड़ौसी राज्यों से आए लोगों ने भागवत कथा सुनी।

दूसरे दिन कथावाचक राष्ट्रसंत डॉ. तरुण मुरारी बापू ने कहा कि यह मनुष्य जीवन बड़ा उपयोगी है। इसके लिए जरूरी है मानवता का भाव रहे। हमारे ग्रंथ, पुराण उपनिशद मनुष्यत्व को जोड़ने का काम करते हैं। जीवन में भक्तिभाव, वैराग्य, और ध्यान का भाव होना चाहिए ना कि अभिमान। उन्होंने कहा कि राम के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इसके लिए कहा कि यदि राम से मिलना है तो यह संभव है, लेकिन राम के चरित्र का अनुसरण करना होगा। निश्चित तौर पर राम से साक्षात्कार होगा।

भागवत कथा महोत्सव में व्यास पीठ की आरती करते घनश्याम सेन और आयोजक मंडल पदाधिकारी।

हेमाद्रि स्नान से यज्ञ की शुरुआत

आयोजन के दूसरे दिन श्रीमारुति महायज्ञ की शुरूआत हेमाद्रि स्नान के साथ की गई। इसके बाद दश विधिस्नान, गणेश पूजा, षोडश मातृका, पूण्यवाचन, कलश पूजन और मंडप प्रवेश के अनुष्ठान आचार्य, पं. निकुंज मोहन पंड्या, भुवन मुकुंद पड्या और दिव्यभारत पंड्या के नेतृत्व में किया गया। यज्ञ के मुख्य यजमान पुष्पेंद्र तंवर हैं। आयोजन के संयोजक घनश्याम सेन ने कहा कि रविवार से कथा का समय दोपहर 3.30 बजे से शाम 7 बजे तक रहेगा। सेन ने भागवत कथा में अधिक से अधिक लोगों को पहुंचकर इसका लाभ लेने का आह्वान किया।

संत और बसंत एक समान

कथा के दौरान संतों के बारे मे विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा कि संत और बसंत एक समान होते हैं। जिस प्रकार बसंत के आने से वातावरण में खुशहाली आती है, प्रसन्नता आती है। ठीक उसी प्रकार से संतों के प्रवचन और संग से जीवन में खुशहाली और प्रसन्नता का भाव जागृत करता है। इसलिए कहा जाता है संतों की संगत में रहना चाहिए। बापू ने राष्ट्र को एक सूत्र में जुड़े रहने की आवश्यकता बताई। कथा के दौरान बापू ने अमरनाथ कथा, बद्रीनाथ कथा, गंगोत्री आदि की कथा सुनाई। राजा परिक्षीत और सुखदेव के प्रसंगों का भी व्याख्यान किया। अंत में गुरुदेव की आरती और भारता माता की आरती उतारी गई। जिसके बाद प्रसाद वितरण हुआ। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन नंदकिशोर सोलंकी, संयोजक घनश्याम सेन, पूर्णाशंकर आचार्य, सुधीर चौबीसा आदि ने किया। वहीं यज्ञ शाला, राम रसोड़ा और टेंट की व्यवस्था दीपक गृहस्थी ने की।

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