भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा.
बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल सहित प्रदेश के 16 सेंटरों पर पीपीपी मोड पर शुरू की गई डायलिसिस सेवा महज टैक्नीशियनों के भरोसे चल रही है। कंपनी ने अब तक यहां डॉक्टर नहीं लगाए हैं। सेंटर पर डॉक्टर और स्टाफ पर्याप्त नहीं होने में राज्य सरकार और निदेशालय की भी लापरवाही साफ दिख रही है।
करार करने वाली कंपनी के इक्विपमेंट और मैन पावर का सत्यापन नहीं किया गया और एमओयू साइन कर दिए गए। प्रदेश के 16 केंद्रों के लिए कोलकाता की एस्केग संजीवनी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से करार किया। करार के मुताबिक कंपनी की ओर से इन केंद्रों पर महज टैक्नीशियन ही उपलब्ध कराए गए हैं। 3 माह बाद भी इन केंद्रों पर डॉक्टर की व्यवस्था नहीं हो पाई है। अब कंपनी तर्क दे रही है उसे डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं। बिना नेफ्रोलॉजिस्ट डॉक्टर के डायलिसिस करना मरीजों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में पीपीपी मोड पर डायलिसिस सेंटर का उद्घाटन मार्च में किया गया। अब तक 200 से अधिक डायलिसिस बिना डॉक्टर के कर दिए गए हैं। भले ही एमओयू कंपनी से हुआ है लेकिन मॉनिटरिंग स्वास्थ्य विभाग की है, जिसमें वह फेल रहा।
सेंटर में सारी सुविधा सरकार की
कंपनी की ओर से सेंटर पर मशीन की भी स्वयं खरीदी नहीं की गई है। सरकार की ओर से जिला अस्पताल को पूर्व में दो डायलिसिस मशीन उपलब्ध कराई गई थी। उसी का संचालन किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर डायलिसिस के लिए जरूरी आरओ प्लांट और जगह की भी व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन की ओर से की गई है। जबकि दो डायलिसिस मशीन और बैड क्षमता होने के कारण जिले के सभी जरूरतमंदों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है। 10 मरीज का पंजीयन ही वेटिंग होने के कारण नहीं हो पाया है। वहीं कई मरीजों को इस निशुल्क सेवा की जानकारी ही नहीं है। जिन्हें रतलाम, उदयपुर, अहमदाबाद, मौड़ासा और शहर के निजी अस्पतालों में जाकर महंगे दामों पर डायलिसिस करानी पड़ रही है।
बांसवाड़ा.डायलिसिस के लिए एमजी अस्पताल में भर्ती मरीज।
डायलिसिस के दौरान इन 3 खतरों की आशंका, इसलिए डॉक्टर जरूरी
1. बीपी कम या ज्यादा होना|
ब्लड प्रेशर कम या ज्यादा होने पर रोगी का जीवन खतरे में रहता है। डॉक्टर की ओर से संभाल नहीं किए जाने पर जान भी जा सकती है।
2.हार्ट की पावर कम होना|
किडनी रोगी के हार्ट की पावर कम हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर ऐसे रोगियों की रेगुलर जांच के बाद डायलिसिस की सलाह देते हैं।
3.पोटेशन बढ़ना|
किडनी रोगियों का कई बार पोटेशन बढ़ जाता है। ऐसे रोगी की पोटेशन फ्री डायलिसिस की जाती है।
कंपनी का तर्क, नहीं मिल रहे डॉक्टर
कंपनी की ओर से राजस्थान के 16 केंद्रों के लिए नियुक्त किए गए एडमिनिस्ट्रेटर दिनेश शुक्ला ने बताया कि सेंटर पर एक मेडिकल ऑफिसर की जरूरत है। वहीं नेफ्रोलॉजिस्ट की विजिट करानी होती है। हमारी ओर से बांसवाड़ा सहित अन्य केंद्रों के लिए डॉक्टरों की तलाश की जा रही है। अब तक 12 केंद्रों पर डॉक्टर मिल गए हैं। बांसवाड़ा में भी अस्पताल प्रशासन से डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कोआर्डिनेशन किया जा रहा है।
तीन माह में 225 डायलिसिस
माह रोगी
20 मार्च से 45
अप्रैल 117
मई 75
कुल 237