परमाणु बिजली घर के लिए अवाप्त होगी 100 हैक्टेयर वन भूमि
भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा
न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की ओर से जिले में स्थापित होने वाले 2800 मेगावाट क्षमता के परमाणु बिजली घर निर्माण के लिए 100 हैक्टेयर वन भूमि अवाप्त करने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को आवेदन किया है। प्रोजेक्ट के अंदर आने वाली वन विभाग की भूमि रकबा 73.77 हैक्टेयर और वाटर कोरिडोर में आने वाली भूमि रकबा 26.35 हैक्टेयर कुल रकबा 100.12 हैक्टेयर जमीन अवाप्त की जाएगी।
कलेक्टर ने विभागीय प्रक्रिया पूरी कर पहले ही अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है। साथ ही उन्होंने उक्त भूमि के बदले कटुंबी के पास कालाखेत और सज्जनगढ़ पंचायत समिति क्षेत्र की भूराकुआं ग्राम पंचायत में राजकीय भूमि को वन विभाग के नाम आरक्षित कर दिया है। जिसका मौके पर वन विभाग की ओर से सर्वे करवाया जा रहा है।
भूमि के बदले कटुंबी के पास कालाखेत और भूराकुआं ग्राम पंचायत में राजकीय भूमि वन विभाग के नाम आरक्षित
100.12 हैक्टेयर वन भूमि के लिए तीन बार भुगतान करना होगा
नए वन क्षेत्रों के विकास में वहां की जलवायु का ध्यान रखा जाएगा : उपवन संरक्षक अमरसिंह गोठवाल ने बताया कि दानपुर के कालाखेत में और सज्जनगढ़ के भूराकुंआ में नए वन क्षेत्र का विस्तार करने के लिए सर्वे कराया जाएगा। जिसके तहत वहां की मिट्टी की विशेषता और जलवायु को ध्यान में रखते हुए पौधे लगाए जाएंगे।
एनपीसीआईवन विभाग की जमीन लेने का सौदा आखिरकार न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को काफी महंगा पड़ेगा, जिसका मुख्य कारण ये है कि पहले तो 100.12 हैक्टेयर वन भूमि अवाप्ति के लिए एनपीसीआईएल को वन विभाग के खाते में जमीन खरीदी के बदले में राशि जमा करवानी होगी। दूसरे चरण में वन विभाग को कलेक्टर द्वारा आवंटित जमीन के लिए भी राशि का भुगतान एनपीसीआईएल को ही करना होगा। तीसरे चरण में जब वन विभाग सर्वे के बाद ये सहमति दे देगा कि कालाखेत और भूराकुआं में आवंटित जमीन पौध रोपण के लिए उपयुक्त है तो उस समय एनपीसीआईएल को तीसरी बार नया वन क्षेत्र विकसित करने वन विभाग के खाते में पौध रोपण के लिए फिर से राशि जमा करवानी होगी।
आगे क्या
उप वन संरक्षक अमर सिंह गोठवाल ने बताया कि अभी एनपीसीआईएल ने वन एवं पर्यावरण विभाग में आवेदन किया है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत रिपोर्ट के लिए फाइल जिला मुख्यालय स्थित वन विभाग के कार्यालय में आएगी। जिसके आधार पर जांच कर फाईल को उच्चाधिकारियों के पास भेजा जाएगा,जहां से फाइल नई दिल्ली स्थित विभाग के कार्यालय में स्वीकृति के लिए जाएगा।