शहर के कुशलगबाग मैदान में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन पुरुषोत्तम माह का महत्व समझाया। कथावाचक डॉ. तरुण मुरारी बापू ने स्पष्ट शब्दों में इसको परिभाषित करते हुए कहा कि पुरुषोत्तम माह का प्रतिनिधित्व ही भागवत कथा ही करती है। भागवत स्वयं नारायण है, जिससे मिलने का माध्यम यहीं कथा है। इसके सुनने मात्र से ही जीवन सफल हो जाता है।
कथा के दौरान जीवन में विजय प्राप्ति के लिए कौरव और पांडव की कथा के माध्याम से संदेश दिया कि विजय उसी को मिलती है जो धर्म मार्ग पर चलता है। इस दौरान उत्तमस्वामी महाराज ने कहा कि पुरुषोत्तम माह में भागवत सुनना भगवान के प्रत्यक्ष दर्शनों के बराबर है। इस अवसर पर महाराज ने भजनों की भी प्रस्तुतियां दी। जिससे पांडाल मौजूद श्रद्धालु मधूर ध्वनि पर झूम उठे। कथा से पूर्व मुख्य यजमान पुष्पेंद्रसिंह तंवर और परिवार ने व्यासपीठ का पूजन किया। भागवत समिति और गणेश मंडल की ओर से स्वागत किया गया। साथ ही चौबीसा समाज, राधाकिशन खन्ना, पूर्णाशंकर शुक्ला, डॉ. रामलाल, नरेंद्र दोसी, डॉ. दीपक द्विवेदी, राजन कोठारी, जेजेवंती ने भी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के दौरान वाद्ययंत्रों पर रोहित मिश्रा, अक्षय, रजत गुर्जर, शुभम, राहुल, संदीप ने सहयोग दिया।
कुशलबाग मैदान में गूंजते रहे वैदिक मंत्र
इधर, कथा से पूर्व सुबह से श्रीमारुति महायज्ञ में विप्रवरों और यजमानों ने पूजन अर्चन और हवन के अनुष्ठान किए। जहां पं. भुवनमुकंद पंड्या, पं. दिव्यभारत पंड्या, पं. निकुंजमोहन पंड्या के आचार्यत्व वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया। पं. भुवनमुकुंद पंड्या ने कहा कि हवन अनुष्ठान के माध्यम से यज्ञ शाला में आहुतियां विभिन्न औषधियों की दी जाती तो वातावरण भी शुद्ध होता है। यह परंपरा सदियों से ऋषि मुनियों द्वारा चलती आ रही हैं आज भी चल रही है।
धर्म-समाज-संस्था
मेहमान का मेजबान ने किया स्वागत
भास्कर संवाददाता|बांसवाड़ा
शहर के कुशलगबाग मैदान में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन पुरुषोत्तम माह का महत्व समझाया। कथावाचक डॉ. तरुण मुरारी बापू ने स्पष्ट शब्दों में इसको परिभाषित करते हुए कहा कि पुरुषोत्तम माह का प्रतिनिधित्व ही भागवत कथा ही करती है। भागवत स्वयं नारायण है, जिससे मिलने का माध्यम यहीं कथा है। इसके सुनने मात्र से ही जीवन सफल हो जाता है।
कथा के दौरान जीवन में विजय प्राप्ति के लिए कौरव और पांडव की कथा के माध्याम से संदेश दिया कि विजय उसी को मिलती है जो धर्म मार्ग पर चलता है। इस दौरान उत्तमस्वामी महाराज ने कहा कि पुरुषोत्तम माह में भागवत सुनना भगवान के प्रत्यक्ष दर्शनों के बराबर है। इस अवसर पर महाराज ने भजनों की भी प्रस्तुतियां दी। जिससे पांडाल मौजूद श्रद्धालु मधूर ध्वनि पर झूम उठे। कथा से पूर्व मुख्य यजमान पुष्पेंद्रसिंह तंवर और परिवार ने व्यासपीठ का पूजन किया। भागवत समिति और गणेश मंडल की ओर से स्वागत किया गया। साथ ही चौबीसा समाज, राधाकिशन खन्ना, पूर्णाशंकर शुक्ला, डॉ. रामलाल, नरेंद्र दोसी, डॉ. दीपक द्विवेदी, राजन कोठारी, जेजेवंती ने भी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के दौरान वाद्ययंत्रों पर रोहित मिश्रा, अक्षय, रजत गुर्जर, शुभम, राहुल, संदीप ने सहयोग दिया।
कुशलबाग मैदान में गूंजते रहे वैदिक मंत्र
इधर, कथा से पूर्व सुबह से श्रीमारुति महायज्ञ में विप्रवरों और यजमानों ने पूजन अर्चन और हवन के अनुष्ठान किए। जहां पं. भुवनमुकंद पंड्या, पं. दिव्यभारत पंड्या, पं. निकुंजमोहन पंड्या के आचार्यत्व वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया। पं. भुवनमुकुंद पंड्या ने कहा कि हवन अनुष्ठान के माध्यम से यज्ञ शाला में आहुतियां विभिन्न औषधियों की दी जाती तो वातावरण भी शुद्ध होता है। यह परंपरा सदियों से ऋषि मुनियों द्वारा चलती आ रही हैं आज भी चल रही है।