बांसवाड़ा| हर साल की भांति इस साल भी सरकार ओर शिक्षा विभाग की ओर से करोड़ों रुपए का खर्च कर गर्मियों की छुट्टियों में शिक्षकों का आवासीय शिविर लगाया जाता है। जिसका विरोध शिक्षक शुरू से ही करते आ रहे हैं।
इस साल के शिविर की शुरुआत सोमवार से हो रही है। ऐसे में प्रारंभिक शिक्षा परिषद के एक निर्णय से शिक्षक संघों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ गया है। प्रारंभिक शिक्षा परिषद की ओर से रमजान के चलते रोजेदारों को रात्रि विश्राम में राहत दी गई है। इस निर्णय पर शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जताई है कि रमजान के साथ पुरुषोत्तम मास भी चल रहा है इसमें भी महिलाएं कठोर व्रत तप करती है, उन्हें भी राहत मिलनी चाहिए। राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेश सचिव गमीरचन्द पाटीदार और पूर्व जिलाध्यक्ष गोपेश उपाध्याय ने इस संबंध में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा निदेशक प्रारंभिक शिक्षा परिषद तथा राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद के आयुक्त सहित प्रमुख शासन सचिव को भेजे पत्र में मांग की है कि 16 जून से पूरे प्रदेश में अधिक मास के व्रत भी प्रारंभ हो गए हैं। हिंदू सनातन धर्म के स्त्री और पुरुष इस अधिक मास में उपवास आदि व्रत करते हैं तथा कई श्रद्धालु तो आरोही और अवरोही क्रम में निवाला लेकर इस मास में कठोर व्रत के साथ तपस्या करते हैं। ऐसे में हिंदू सनातन धर्म के शिक्षक शिक्षिकाओं को भी उपवास तपस्या के मद्देनजर प्रशिक्षण के दौरान रोजेदारों की तरह ही प्रशिक्षण कार्यक्रम से शाम के सत्र के बाद उन्हें घर जाने की छुट दी जानी चाहिए।