भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा
पेशे से डॉक्टर और समृद्ध परिवार में जन्मे डॉ. तरुण मुरारी बापू ने वर्ष 1992 में दीक्षा ग्रहण कर संन्यासी जीवन जीना शुरू किया। धन और समृद्धि का परित्याग कर राष्ट्र जागरण करने के लिए संत बने और कथाओं और अनुष्ठान के माध्यम से धर्म और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश दिया। अब तक 26 सालों में 524 भावगत कथा और 40 राम कथा और 50 से अधिक गौ कथा का वाचन किया है। इसके अलावा 108 कुंडीय श्रीमारुति महायज्ञ देश के कई क्षेत्रों में संपन्न कराए। डॉ. तरुण मुरारी की जीवन में राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव तब जगा, जब 1992 में अयोध्या में कारसेवा के दौरान मलबे में फंस गए थे। जिंदगी और माैत से संघर्ष कर रहे थे, उन्हें उमा भारती ने मलबे से बाहर निकाला। इससे मिली दूसरी जिंदगी ने बापू के जीवन में संत बनकर देश सेवा का करने का संकल्प जगा। डॉ. तरुण मुरारी बापू से भास्कर की विशेष बातचीत।
देश में 80 फीसदी संतों में भरा आडंबर, 20 फीसदी संत एक होकर बनाएंगे भारत को विश्वगुरु, एक ही मकसद है देशसेवा
पिताजी ने दी राष्ट्रसेवा की प्रेरणा
तरुण मुरारी बापू के पिता कन्हैयालाल शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। उन्होंने इस हादसे के बाद प्रेरित किया कि वो अपनी नई जिंदगी को राष्ट्र के नाम समर्पित करें और देश में राष्ट्र सेवा का संकल्प लेकर कार्य करें। इसके बाद पूज्यपाद महामंडलेश्वर भगवानदास महाराज और बाबा हठयोगी दिगंबर महाराज से दीक्षा लेकर डॉ. तरुण मुरारी बापू बने। तब से कथा, यज्ञ और अनुष्ठान के साथ सर्वधर्म के आयोजनों में राष्ट्र प्रेम का भाव जागृत कर रहे हैं। इसके अलावा अपने आश्रमों में देशभर में अनाथ बच्चों को भी सहारा देते हैं।
डॉक्टर का काम अब व्यवसाय
डॉक्टर तरुण मुरारी बापू ने बताया कि डॉक्टर का काम अब एक व्यवसाय बन गया है। कोई कितना भी त्यागी डॉक्टर हो, लेकिन वो व्यवसाय है। व्यवसाय में धन देखा जाता है। पढ़ाई के बाद उस प्रोफेशन में रहता तो सार्वजनिक तौर पर इतनी राष्ट्र सेवा का अवसर नहीं मिलता। बापू ने बताया कि वो आयुर्वेद में प्रणवाचार्य थे, कभी कोई मरीज आ जाता है तो निशुल्क इलाज कर उसका समाधान करते हैं। लेकिन सतत यह कार्य नहीं करते। अभी एक ही मकसद है देश सेवा, राष्ट्रसेवा का।
संतों में भरा पड़ा है आडंबर
यह सही है कि वर्तमान में संतों पर भी भरोसा करना लोग सही नहीं समझते। 80 फीसदी संतों में आडंबर, चेला-चपाटी और कई वाहन रखने के शौक पाल रखे हैं। इस आडंबर से परे 20 फीसदी संत ऐसे हैं जो धर्म जागरण, भारतीय संस्कृति और परंपरा के प्रचार प्रसार के साथ राष्ट्र भक्ति की भी अलख जगा रहे हैं। भारत को विश्व गुरु बनाना है तो संतों को एक होकर एक मंच पर आना होगा। क्योंकि समाज को एकता और अखंडता का पाठ साधु-संत ही पढ़ा सकते हैं।
सरकार न बनाए तो हम बनाएंगे राम मंदिर
एक संकल्प है राम मंदिर का निर्माण कराना। अगर सरकार 2019 में राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू नहीं करती है तो खुलेआम घोषणा है कि सिंहनाद होगा, रणभेरी बजेगी। हम सरकार के विरोध में खड़े हो जाएंगे। हम अपने हाथों से राम मंदिर का निर्माण शुरू कराएंगे।