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झटका: बांसवाड़ा में सिर्फ ठंडा होगा दूध, डूंगरपुर में लगेगा डेयरी प्लांट

3 वर्ष पहले
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हमारे बांसवाड़ा में 2 साल से सरस चीलिंग प्लांट बंद है और अब हाल फिलहाल यह डेयरी भी नहीं बन पाएगी। क्योंकि, सरकार की मंशा यहां की बजाय डूंगरपुर में डेयरी प्लांट खोलने की है। इसे लेकर राजस्थान को-आॅपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड के महाप्रबंधक एलसी बलाई की ओर से गोपालन विभाग के डिप्टी सेक्रेट्री को भेजे प्रपोजल से साफ जाहिर हाेती है। 19 जुलाई को भेज प्रपोजल में मुख्यमंत्री की बांसवाड़ा दौरे का हवाला देते हुए बांसवाड़ा में चीलिंग प्लांट को ही विकसित करने के लिए 10 करोड़ 50 लाख और डूंगरपुर में डेयरी प्लांट के लिए 29 करोड़ 15 लाख का प्रस्ताव शामिल किया है। अगर ऐसा होता है तो यहां के पशुपालकों के डेयरी से रोजगार की उम्मीद टूट सकती है। हालांकि प्रस्ताव पर सरकार की मोहर अभी बाकि है। डूंगरपुर में डेयरी प्लांट बनने जाने के पीछे वहां के नेताओं की इसे लेकर विशेष प्रयास बताए जा रहे है। आपको ध्यान होगा कि मई में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे बीते महीनों डूंगरपुर और बांसवाड़ा दौरे पर आई थी। यहां 29 मई को आनंदपुरी में जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान पशुपालकों ने मुख्यमंत्री राजे से डेयरी विकास की बात कही थी। मुख्यमंत्री ने उसी समय अधिकारियों को इस बारे में ठोस प्लानिंग बनाने के लिए कहा थी। जिसके बाद 2 जून को कलेक्ट्रेट सभागार में विशेष बैठक हुई। जिसमें बांसवाड़ा डेयरी का पूरी तरह से नवीनीकरण करने के लिए 20 करोड़ लागत की योजना बनाई गई। इसमें प्रमुख शासन सचिव नरेशपाल गंगवार, राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फैडरेशन के एमडी जाकिर हुसैन, संभागीय आयुक्त भवानी सिंह देथा,कलेक्टर भगवतीप्रसाद, राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फैडरेशन के अध्यक्ष रूपेंग भाई पाटीदार, बांसवाड़ा सरस डेयरी के एमडी नटवरसिंह चूंडावत मौजूद रहे थे। डेयरी का विकास नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से करवाया जाना तय किया था। जिसके तहत राज्य सरकार, टीएडी और राजस्थान कॉपरेटिव फैडरेशन के संयुक्त सहयोग से डेयरी में नवीनतम तकनीक के दुग्ध प्रोसेसिंग, शुद्ध घी बनाने वाली मशीनें, छाछ-मक्खन और दूसरे उत्पादनों के निर्माण संबंधी मशीनें लगाने का प्रस्ताव तय किया गया था।

तकनीकी खामी बता 2 साल से बंद है प्लांट

बांसवाड़ा डेयरी प्लांट बीते 2 साल से बंद है। यहीं वजह है कि यहां के पशुपालकों का दूध करीबी गुजरात और मध्यप्रदेश की दूध कंपनियां कम दाम पर खरीद रही है। वहीं दूध प्रोसेसिंग-पैकिंग के बाद यहां लाकर ऊंचे दामों में दिया रहा है। ढाई साल पहले बांसवाड़ा क्रय-विक्रय सहकारी समिति के कार्यक्रम में शामिल होने आए सहकारिता मंत्री अजयसिंह किलक पशुपालकों के हित में कदम उठाने और मरणासन्न डेयरी प्लांट को नया जीवन देने की घोषणा कर गए थे लेकिन इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। दरअसल, 8 हजार लीटर दूध रोजाना इकट्ठा कर उदयपुर भेजने और इतना ही वापस मंगवाकर शहर में बिक्री कर डेयरी चलाई जा रही थी। डेयरी प्लांट की तकनीकी खराबियां बढ़ी, तो अक्टूबर,16 से मेंटीनेंस के नाम पर प्लांट पूरी तरह बंद कर दिया गया। पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में गाय, भैंस, भेड़, बकरी और ऊंट मिलाकर करीब 2 लाख पशु दूध देते हैं। ऐसे में डेयरी प्लांट यहां बनने से स्थानीय पशुपालकों को इसका फायदा मिलता।

3 साल में बनेगी डेयरी

50 हजार लीटर रहेगी क्षमता

प्रस्ताव पर गौर करे तो डूंगरपुर में तीन साल में डेयरी प्लांट बनेगा। रोजाना 50 हजार लीटर दूध की क्षमता वाले डेयरी प्लांट के लिए 29 करोड़ 15 लाख खर्च आंका गया है जबकि बांसवाड़ा के चिलिंग सेंटर की मौजूदा 10 हजार लीटर की क्षमता बढ़ाकर 30 हजार लीटर कर दी जाएगी। इस पर 10 करोड़ 50 लाख खर्च आएगा। प्रस्ताव में ये साफ लिखा गया है कि मुख्यमंत्री की डूंगरपुर यात्रा के दौरान बांसवाड़ा दूध यूनियन की सभी गतिविधियां डूंगरपुर में केंद्रित की जाए।

इन डेयरियों का है बोलबाला

अमूल 40 से 42 हजार लीटर

मधुरम 7 से 8 हजार

मधुर 15 से 20 हजार

पंचामृत गोधरा 22-25 हजार लीटर

कहां लगाना यह सरकार पर निर्भर

सीएम के डूंगरपुर विजिट के बाद दोनों जिलों से प्रस्ताव मांगे थे। बांसवाड़ा का प्रस्ताव मेरी ज्वाइनिंग से पहले भेजा जा चुका था। डूंगरपुर डेयरी प्लांट का प्रस्ताव भेजा है। डेयरी प्लांट कहा लगेगा यह सरकार पर निर्भर है। उमेश गर्ग, एमडी

डूंगरपुर में बन सकता है डेयरी प्लांट

दोनों जिलों में चिलिंग प्लांट ही थे। दोनों जिलों से प्रस्ताव दिए है। लेकिन हमारी वार्ता हुई जिसमें बताया कि डूंगरपुर में दूध ज्यादा आ रहा है। वहां से उदयपुर नजदीक है। जिससे ट्रांसपोर्ट का खर्चा कम आएगा। प्लांट बनने से जमीन भी अस्त-व्यस्त जमीन भी कवरेज हो जाएगी। डूंगरपुर प्रवास से मुख्यमंत्री के लौटने के बाद आरसीडीएफ की बैठक में डूंगरपुर में डेयरी प्लांट लगाने और बांसवाड़ा में चिलिंग प्लांट डेवलप करने का निर्णय लिया था। रुपेंग पाटीदार, अध्यक्ष, राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फैडरेशन

मैं कुछ भी नहीं कह सकता

मैं इस मामले में कुछ भी बोलने के लिए अधिकृत नहीं हूं। स्थानीय जिला प्रशासन या वहां के डेयरी प्रबंधन से आप जानकारी ले सकते है। अभी प्रस्ताव भेजे है। सरकार की निर्णय बाकि है। डेयरी कहा लगेगी यह कहना अभी साफ नहीं है। एल.सी. बलई, डीपीएम

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