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267 लोगों वाले गांव में पांच शौचालय, पीने के पानी के लिए केवल दो हैंडपंप

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता |बांसवाड़ा

गांवों के विकास की बात वर्षों से हो रही है, लेकिन बांसवाड़ा शहर से सात किलोमीटर दूर 67 घरों की आबादी वाले चित्राडूंगरी गांव की दशा चौंकाने वाली है। यहां पहुंच के लिए सड़क अब तक कच्ची है, तो पीने का पानी के लिए 267 लोग दो हैंडपंप पर निर्भर हैं। पूरे गांव में मात्र 5 शौचालय हैं। इनमें भी दो पक्के और बाकी गड्ढा खोदकर बनाए कच्चे हैं।

यह तथ्य इंजीनियरिंग कॉलेज की ओर से किए हाल की किए सर्वे में सामने आए हैं। सामाजिक सरोकार की गतिविधियों के तहत फरवरी में चित्राडूंगरी को गोद लेकर किए सर्वे से सामने आया कि गांव में बेसिक सुविधाएं ही नहीं हैं। यादव समाज बहुल इस गांव के ज्यादातर लोग मजदूरी करते हैं और घर-परिवार सरकारी मदद को मोहताज हैं।

आमदनी औसतन 6 हजार, बिजली है पर ज्यादातर कनेक्शन कटे
सर्वे रिपोर्ट से गांव के मौजूदा हालात चिंताजनक सामने आए। यहां के परिवारों की औसत आमदनी 6 हजार रुपए सामने आई, तो कृषि भूमि चार जनों के पास ही पाई गई। आधे से ज्यादा घर बीपीएल श्रेणी के होते हुए परिलाभों से वंचित रहे। इसके पीछे बड़ा कारण ज्यादातर लोगों के अनपढ़ होना सामने आया। गांव में नौकरीपेशा लोग दो घर के ही हैं। गांव में बिजली कनेक्शन तो कई घरों में हैं, लेकिन ज्यादातर बिल नहीं भर पाने से काटे हुए हैं। 67 में से 56 परिवारों की माली हालत बिगड़ी होने का बड़ा कारण यह भी सामने आया कि इनमें कमाऊ शख्स शराब पीने का आदी है। इसके चलते बच्चों की शिक्षा और घर-परिवार पर खर्च के लिए पैसे ही नहीं बचते। हालांकि चित्रा डूंगरी के 84 बच्चे स्कूल जा रहे हैं, लेकिन दसवीं-बारहवीं तक पहुंचने वाले कम ही हैं। कॉलेज का मुंह देखने वाले तो यहां 8 लोग ही बताए गए।

चित्राडूंगरी गांव की कच्ची सड़क। गांव के भीतर पंचायत ने सीसी सड़़क बनवाई, लेकिन पहुंचने का रास्ता वर्षों से कच्चा ही है।

इसलिए चुना चित्राडूंगरी, पांच साल के भीतर लाएंगे बदलाव
इस गांव को गोद लेने की मंशा के पीछे कहानी भी कम रोचक नहीं है। कॉलेज प्राचार्य डॉ. शिवलाल बताते हैं कि जब उन्होंने यहां ज्वाॅइन किया, चित्रा डूंगरी के लोग कॉलेज के खुले परिसर में मवेशी चराने और शौच के लिए आते थे। दो-चार बार समझाइश की, तो बात बनी। फिर बातों-बातों में ही उनकी परिवार के हाल मालूम हुए। दो-चार जरूरतमंदों को उनकी योग्यता अनुसार कॉलेज में ही रोजगार से जोड़ा पर उनसे गांव की दुर्दशा का फीडबैक मिला तो सरकार की हर कॉलेज द्वारा एक गांव गोद लेकर विकास की गतिविधियां चलाने की योजना ध्यान आई और यहीं से शुरुआत करने की ठानी। फिर कॉलेज की टीम से सर्वे करवाकर प्रपोजल बनाए तो चर्चा पर ही वित्तीय स्त्रोत सामने आने लगे। अब मंशा यहां के बच्चों-बड़ों को मोटिवेट करके शिक्षा से जोड़ने की है। प्लानिंग के साथ प्रयास शुरू कर दिए हैं, सहयोग मिलता रहा, तो पांच साल के भीतर इस गांव की काया पलट कर चित्रा डूंगरी को मिसाल बनाएंगे।

दूसरे फेज में शिक्षण-प्रशिक्षण ताकि जागरूकता बढ़े
इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करवाने के साथ दूसरे फेज में कॉलेेज का इरादा चित्रा डूंगरी में सभी बच्चों को स्कूल एजुकेशन से जोड़ना है। इसमें नवोदय विद्यालय में छठी की प्रवेश परीक्षा के लिए बच्चे चिह्नित कर तैयारी करवाकर भर्ती कराना प्राथमिकता रहेगी। इसके साथ जो युवा अनपढ़ बेरोजगार हैं, उनके लिए कॉलेज में लेथ मशीन ऑपरेटर, वेल्डर, इलेक्ट्रिशियन के काम शाम के दो घंटे सिखाए जाएंगे, जिससे स्कील्ड का विकास होने पर उन्हें अच्छी आमदनी मिल सके।

तीन महीने में कॉलेज ने जरूरतों पर किया फोकस, अब शिक्षा की बारी
गोद लेकर सर्वे के बाद इंजीनियरिंग कॉलेज ने सबसे जरूरी पीने के पानी के लिए प्लानिंग की और यहां सबमर्सिबल पंप, पानी की टंकी और सभी घरों में नल लगवाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया। समन्वयक रवि माहेश्वरी और अंकुर कुलश्रेष्ठ के अनुसार 5 लाख की लागत के इस प्रस्ताव पर गढ़ी विधायक जीतमल खांट से बात कर उनके विधायक मद से मंजूरी के लिए जिला परिषद भेजा गया है। इसके अलावा गांव तक सड़क निर्माण के लिए 33 लाख की लागत का प्रस्ताव मनरेगा के तहत कलेक्टर को भेजा है। इसके अलावा 5-5 कॉमन शौचालय-स्नानघर बनवाने की योजना स्वच्छ परियोजना को प्रस्तावित की गई है।

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