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प्रशासन ने पाबंद कर छोड़ा, परिवार वालों ने मंदिराें और देवरों में चुपके से करवा दिए ब्याह, आज फिर बाल विवाह की आखातीज

3 वर्ष पहले
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प्रिंयक भट्‌ट, चिराग द्विवेदी, हेमंत पंड‌्या| बांसवाड़ा/चिड़ियावासा

आखातीज पर बाल-विवाह की सूचना पर प्रशासन शादी रुकवाकर परिजनाें को पाबंद करवाता है, लेकिन परिजन इसके बाद भी मंदिरों-देवरों में चोरी-छिपे बच्चों की शादी करवा देते हंै। पिछले तीन साल में प्रशासन ने 110 बाल-विवाह रुकवाए। भास्कर ने इन्हीं जगहों पर जाकर पड़ताल की तो सामने आया कि कइयों ने बच्चों की शादी रचा दी। जिन परिजनों को अपनी बच्चियों के बालिग होने तक ब्याह नहीं कराने पाबंद किया था, उनकी उसी दौरान डोलियां उठ चुकी थी और जिन बेटों की उम्र पढ़ाई करने की थी,उनके हाथ पीले कर दिए गए। सरकार ने महिलाओं के लिए 18 और पुरुषों के लिए 21 साल की उम्र शादी के लिए तय कर रखी है। इससे पहले शादी कराना कानून अपराध है। लेकिन भास्कर टीम ने पड़ताल को तो 16 साल की उम्र में भी बच्चियों का ब्याह कराना सामने आया है। बाली उम्र में बच्चियों के विवाह कराने का दंश झेल रहे बांसवाड़ा में आखातीज के अबुझ मुहुर्त में परिजनों ने बुधवार को कई बालिकाओं को वधु बनाने की तैयारी कर ली है। मंगलवार को कुछ जोड़े बाजार में खरीदारी करते भी नजर आए। हालांकि प्रशासन अपनी पूरी तैयारी का दावा कर रहा है।

इन 3 केस से जानिए पाबंद करने के बाद भी हो रहे बाल विवाह

केस:1 16 साल में डाल दी वरमाला

चिड़ियावासा. ग्राम पंचायत सुंदनी के पोछियापाड़ा में 21 मई 2017 को देवचंद डामोर के 16 साल के बेटे प्रवीण का बाल विवाह तेजपुर गांव की एक लड़की से कराया जा रहा था। सूचना मिलने पर प्रशासन ने पहुंचकर रुकवाया और परिजनों को पाबंद किया गया। उस समय तो परिजन मान गए लेकिन इस कार्रवाई के बाद परिजनों से चुपके से शादी करवा दी। इसकी भी जानकारी प्रशासन को हो चुकी थी लेकिन इसके बाद भी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

प्रवीण

अंबा

अंबा

बाली उम्र में ब्याह तो परिणाम भी दुखद : नवजातों की हो रही मौत

भास्कर ने कम उम्र में शादी के नुकसान के लिए पिछले महीनों 90 नवजातों की मौतों की माताओं के बारे में भी जानकारी जुटाई। जिसमें भी कई मांओं की उम्र काफी कम थी। 2 महिलाएं ऐसी थी जो कम उम्र में मां बन गई, तो कईयाें में खून की बेहद कमी थी।

भास्कर ने पाबंद कराए परिवारों के घर जाकर की पड़ताल तो खुलासा

अच्छी पहल भी सामने आई, शादी के बाद पूरी कर रहे पढ़ाई

डूंगरपुर के साबला गांव की धुली प|ी शंकर ने 20 साल की उम्र में ही दो बच्चों को जन्म दिया। इसमें एक नवजात की मौत हो गई। जब धूली का प्रसव हुआ उसके शरीर में हिमोग्लोबीन भी 9.8 ग्राम ही था। प्रसव के बाद बच्चा कमजोर पैदा हुआ जिसका वजन 1.315 ग्राम ही था इसके साथ ही संक्रमण के कारण उसकी मौत हो गई।

केस-1

केस:2 प|ी कॉलेज तो पति जा रहा है स्कूल

छोटी सरवन तहसील के सजवानिया गांव का रहने वाला 17 साल का शंकर पुत्र भारता जो अभी 10 कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। उसकी 20 साल प|ी मंजू कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। शंकर को कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी आ गई हैं। जो उसकी पढ़ाई में भी व्यवधान डाल रही है। जानकारी मिलने पर भास्कर जब शंकर के घर पहुंचा तो मंजू वहां मौजूद नहीं थी। इन दोनों का बाल विवाह 17 अप्रैल 2016 को रुकवाया गया था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद दोनों की शादी करा दी गई हैं। शंकर ग्ैराज में काम कर घर की जिम्मेदारी निभा रहा है।

शंकर

मंजू

दानपुर की रहने वाली अनिता प|ी विकास ने 18 साल की उम्र में ही बच्ची को जन्म दिया, लेकिन उसे भी मां का प्यार नहीं मिला। प्रसव के दौरान अनिता का वजन भी काफी कम था। जिसका असर बच्ची पर देखने को मिला। नवजात बच्ची का वजन महज 1 किलो और 38 ग्राम ही था। गंभीर अवस्था में भर्ती करने के बाद भी उसकी जान नहीं बच सकी। बच्ची को सांस लेने में तकलीफ थी।

केस-2

केस:3 बड़ा कुंवारा, छोटे की शादी

छोटी रेल गांव में एक परिवार एेसा भी हैं जहां बड़े भाई की शादी इसलिए नहीं की क्योंकि वो फिलहाल डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहा है। इसलिए उसकी पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आने पाए। लेकिन इसी परिवार में छोटे बेटे को कम उम्र में ही शादी कराकर उस पर गृहस्थी का बोझ डाल दिया। 28 जनवरी 2017 को ही प्रशासन ने मकन के घर पर पहुंचकर वहां 16 साल के बेटे पूंजा के विवाह को रुकवाया था, लेकिन यहां भी प्रशासन और विभाग की पाबंदी काम नहीं आई और चुपके से पूंजा का ब्याह अंतु से करा दिया गया। इसके अलावा जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से एक साल के दौरन कई स्थानों पर परिजनों को पाबंद किया लेकिन इसक बाद भूल गए।

जिम्मेदारी निभाएं - आज अगर आपको बाल विवाह होता दिखे तो कंट्रोल रूम के नंबर 02962-241100 पर दें सूचना

12 फीसदी नाबालिग मां और गर्भवती

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 2015-16 के मुताबिक बांसवाड़ा जिले में 12.1 फीसदी किशोरियां जिनकी उम्र 15 से 19 साल की थी वो मां बन चुकी थी और कुछ गर्भवती थी। चिंता इसलिए करनी चाहिए क्योंकि यह आंकड़ा संभाग में सबसे ज्यादा बांसवाड़ा का है।

15 से 19 की उम्र के बीच बनी मां

जिला प्रतिशत

बांसवाड़ा 12.1

डूंगरपुर 6.9

प्रतापगढ़ 4.8

राजसमंद 4.8

उदयपुर 6.8

प्रदेश में इतनी फीसदी किशोरियों का होता है विवाह

जिला प्रतिशत

अलवर 40.8

बाड़मेर 46.7

भीलवाड़ा 57.2

चित्तौड़गढ़ 53.6

गंगानगर 19.0

हनुमानगढ़ 23.1

जयपुर 29.5

जैसलमेर 48.4

करौली 49.8

टोंक 47.3

उदयपुर 40.4

अजमेर 35

बारां 33.7

भरतपुर 37.3

बीकानेर 33.4

बुंदी 35.1

चुरू 36.4

जयपुर 29.5

जिला प्रतिशत

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