रिप्लेसमेंट नहीं तो पहले पीएमओ को ढूंढो, तब ही मिलेगा खून
भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा
एमजी अस्पताल में अगर किसी को खून की आवश्यकता है तो उसके परिजनों को इसके बदले में खून देना होगा। अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो खून उपलब्ध कराने के लिए मरीज के परिजनों को पीएमओ की स्वीकृति लेनी ही होगी। इसके बाद भी ब्लड बैंक प्रभारी खून देगा। इसके लिए पीएमओ डॉ. अनिल भाटी ने आदेश भी जारी कर दिया है। ऐसा नहीं करने पर तो ब्लड बैंक इंचार्ज और कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। हैरानी की बात है कि पीएमओ ने जो आदेश जारी किया है, उसमें खून की आवश्यकता वाली अनिवार्य श्रेणी के मरीजों के लिए कोई स्पष्ट दिशा निर्देश जारी नहीं हुए है। इससे इन श्रेणियों के मरीज भी पशोपेश में हैं। पीएमओ का कहना है कि इस आदेश को जारी करने के पीछे अस्पताल में चैरिटी के तहत अधिक खून देने की व्यवस्था को नियंत्रित करना है। ऐसा करने पर कई बार खून की आवश्यकता होने पर संबंधित श्रेणी का खून नहीं मिल पाता। इस पर इंचार्ज डॉ. प्रवीण गुप्ता ने भी सभी डॉक्टरों से सहयोग मांगा हैं।
नई व्यवस्था
एमजीएच में लैब टैक्नीशियन और ब्लड बैंक प्रभारी को बतानी होगी इमरजेंसी, मरीज के परिजनों को ही देना होगा खून
आदेश का फायदा
पीएमओ के इस आदेश से चैरिटी में दिए जाने वाले ब्लड में कमी आएगी और लोगों को रिप्लेसमेंट देना ही होगा। बैंक में खून भी उपलब्ध रहेगा। अधिकांश केस में मरीज और उनके परिजन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सिफारिश करवाते हैं। इस पर लगाम लगेगी।
आदेश के नुकसान
जनजाति क्षेत्रों में लोगों में जागरुकता के अभाव में लोग रिप्लेस में खून दान नहीं करते। इसलिए चैरिटी में खून उपलब्ध कराया जाता है। लाइफ सेविंग पेशेंट जिसे तत्काल खून जरूरी हैं, ऐसे में क्रॉस मेचिंग और पीएमओ की परमिशन लेने के फेर में मरीज को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
पिछले 4 माह में ब्लड बैंक से सप्लाई
माह रिप्लेसमेंट चैरिटी
जनवरी 10 166
फरवरी 111 113
माह रिप्लेसमेंट चैरिटी
मार्च 130 143
अप्रैल 137 153
इसलिए अधिक चैरिटी की मजबूरी
जिले में कुपोषण एनिमिया पीड़ित गर्भवतियों के प्रसव के मामले बढे़ हैं। ऐसे में ब्लड बैंक से 50 से 60 फीसदी ब्लड तो चैरिटी में ही देना पड़ता है। जिनके परिजनों से लाख कोशिशों और समझाइश के बाद भी रिप्लेस नहीं किया जाता है। ऐसे में दिक्कतें इनके सामने आ सकती हैं।
इन श्रेणियों के मरीजों को आएगी परेशानी
अस्पताल में थैलीसीमिया, एचआईवी ग्रस्त, बंदी और 12 साल से छोटी बालिकाएं जो लाडली बेटी योजना में शामिल है, उनको चैरिटी के तहत ब्लड उपलब्घ कराया जा रहा है। पीमएओ द्वारा आदेश में इनके लिए कोई निर्देश नहीं है, इस कारण विरोधाभास की स्थिति बनी है।