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एमजीएच के जनरल वार्ड में मरीजों को फर्श पर लिटाया, सुविधाओं को तरसे

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा

देश के मॉडल अस्पतालों में चयनित, प्रतिदिन 700 से 800 ओपीडी और 150 से 200 तक आईपीडी मरीजों की क्षमता वाला महात्मा गांधी अस्पताल। जहां पर्ची काटने, आईसीयू वार्ड, कॉटेज वार्ड में मरीजों की भर्ती करने के साथ ही भामाशाह बीमा योजना में मरीजों को इलाज कराने के नाम पर एमआरएस में पैसा उपलब्ध होता है। लेकिन जिन मरीजों से यह राशि प्राप्त हो रही है उसका लाभ उन्हीं मरीजों को नहीं मिल रहा। बेहतर इलाज, उपचार और सेवा तो दूर भर्ती मरीजों को सोने के लिए बैड तक नसीब नहीं हो रहे। जबकि कई वार्डों में मरीज संख्या कम होने के कारण बैड खाली पड़े रहते हैं। राज्य सरकार ने भी वर्ष 2015-16 में अपने बजट भाषण में अस्पताल की बैड क्षमता में 50 बैड का इलाफा किया था। महात्मा गांधी अस्पताल में पिछले करीब 2 सालों से व्यवस्थाएं बदहाल हो गई हैं। 80 से 100 किमी दूरी का सफर कर इलाज कराने आने वाला मरीज भी यहां राहत के बजाय ठोकरें खा रहा है। हर तीन माह में होने वाली एमआरएस की बैठकों में व्यवस्थाओं में सुधार के लाखों का बजट पारित होता हैं, लेकिन इसका फायदा मरीजों को नहीं मिल रहा। स्थिति यह है कि यहां भर्ती होने वाले मरीज को सोने के लिए बैड तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। चाहे मरीज कितना भी गंभीर हो या सामान्य। वार्डों ऑपरेशन वाले मरीजों को नीचे सुलाया जा रहा है। जबकि सरकार ने 2015-16 के बजट भाषण में जिला अस्पताल में बैड क्षमता 50 बढ़ा दी थी।

ऑपरेशन वाले मरीजों पर संक्रमण का खतरा

अस्पताल के फीमेल वार्ड में जमीन पर लेटी महिला मरीज।

एमजी अस्पताल में सिजेरियन को छोड़ अन्य ऑपरेशन वाले मरीजों की उचित देखभाल और इलाज नहीं हो पा रहा है। आनन फानन में स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए प्रबंधन ने पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड पर ही ताले लगा दिए। जबकि नियमों के मुताबिक ऑपरेशन के बाद मरीज को 3 से 5 दिन तक विशेष ऑब्जरवेशन में रखा जाता है। लेकिन यहां ओटी से बाहर आते ही सीधे अन्य मरीजों के साथ जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया जा रहा है। जबकि वर्तमान में नर्सिंग स्टाफ की संख्या पर्याप्त है। सीधे जनरल वार्ड में शिफ्ट करने के कारण संक्रमण से टांकों के पकने का भी खतरा मंडरा रहा है। गौरतलब है कि सिजेरियन के बाद संक्रमण से टांके पकने की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी है।

ऑर्थोपीडिक वार्ड

3 माह से मरीजों को शौच के लिए जाना पड़ रहा बाहर

ऑर्थोपेडिक वार्ड जहां हाथ पांव टूटे मरीज जो ज्यादा चल फिर नहीं सकते उन्हें भी शौच और बाथरूम के लिए बाहर भटकना पड़ रहा है। वार्ड में पिछले करीब 3 माह से रिपेयरिंग का काम चल रहा है। लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में हाथ पांव मरीजों को परिजन दूसरे वार्ड में उठाकर शौच के लिए ले जा रहे हैं। वार्ड स्टाफ ने बताया कि काफी समय से यह समस्या आ रही है, ठेकेदार की ओर से काम समय पर नहीं किया जा रहा। मरीजों को तकलीफ होती है।

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