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सोयाबीन की फसल पर कीड़ों का प्रकोप बारिश रुकने से खराब होने का खतरा बढ़ा

3 वर्ष पहले
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बांसवाड़ा| वागड़ में पिछले 5 सालों में सोयाबीन की फसल का रकबा 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। लेकिन इस बार बांसवाड़ा-डूंगरपुर में एक लाख हैक्टेयर में बोई फसल पर खतरा मंडरा रहा है। एक तो फसल पर गर्डल बीटल, सेमी लूपर, हेली कोवर्पा, तंबाकू की इल्ली का प्रकोप बढ़ा है, दूसरा पिछले 15 दिनों से बारिश नहीं होने से फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि धूप निकल गई, तो इन कीटों का सोयाबीन की फसल पर काफी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इस बार किसानों को सोयाबीन की फसल के प्रति खासी सावधानी रखनी होगी। बांसवाड़ा व डूंगरपुर के किसान सोयाबीन को नकदी फसल मान कर पिछले कुछ सालों से इसकी अधिक खेती कर रहे हैं। इस सीजन में बांसवाड़ा में 70 हजार हैक्टेयर और डूंगरपुर जिले में 35 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की फसल बोई गई है। संभागीय कृषि अनुसंधान केंद्र बोरवट बांसवाड़ा के संभागीय निदेशक कृषि अनुसंधान डॉ. प्रमोद रोकड़िया ने बताया कि इस दौरान पत्ती खाने वाले कीट जैसे हेलीकोवर्पा, स्पोडोप्टेरा, एक्सीगुआ, सेमीलूपर का प्रकोप कहीं -कहीं दिख रहा है, जिस पर नियंत्रण नहीं करने से ये पौधों को खास नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे सोयाबीन की पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है। पौधों की स्थिति को देखते हुए संबंधित कीटनाशी दवा का छिड़काव करने से पौधों को बचाकर अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। साथ ही अब तक इस सीजन में सिर्फ 17 दिन बारिश हुई है। इसमें 424 मिलीमीटर औसत बारिश हो चुकी है। वहीं माही बांध का जलस्तर 274.05 मीटर दर्ज किया जा चुका है।

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