- Hindi News
- National
- परिवीक्षा काल पूरा होने के बाद भी नए नियम बताकर दस शिक्षकों का स्थायीकरण नहीं
परिवीक्षा काल पूरा होने के बाद भी नए नियम बताकर दस शिक्षकों का स्थायीकरण नहीं
जिले में 2015 में नियुक्त तृतीय श्रेणी के दस शिक्षकों का परिवीक्षा काल पूरा होने के बाद भी स्थायीकरण नहीं हो पा रहा। पंचायतीराज विभाग के कायदे बदलने की आड़ में इन्हें टाला जा रहा है, जबकि परिवर्तन 2016 के बाद हुआ। इससे परेशान शिक्षकों ने शुक्रवार को जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक के सामने अपना पक्ष रखा।
दरअसल, 2013 की भर्ती प्रक्रिया के तहत 2015 में प्रदेशभर में कई शिक्षक नियुक्त हुए, जो आवेदन के समय एसटीसी द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षु थे। तब नियम यह था कि दस्तावेज सत्यापन के समय आवेदक अहर्ताएं पूरी करता है, तो वह नियुक्ति के पात्र माना जाएगा। इसी नियम के बूते 2012 की भर्ती हुई, लेकिन 2013 में आनाकानी पर आवेदक कोर्ट गए और पुराना हवाला दिया। तब कोर्ट ने इनसे ऑफलाइन आवेदन लेने के निर्देश दिए। फिर परीक्षा का परिणाम देरी से आया, तो आवेदकों ने जोधपुर हाईकोर्ट की शरण ली। वहां भी 2012 की भर्ती के हवाले पर हाईकोर्ट का आदेश हुआ, तो प्रक्रिया पूरी कर विभाग ने इन शिक्षकों की काउंसलिंग के साथ पोस्टिंग दी। अब परिवीक्षा काल पूरा होने पर स्थायीकरण के समय पंचायतीराज विभाग में 2016 में बने नियम का हवाला देकर टाला जा रहा है। नए नियम के तहत आवेदन के समय अहर्ताएं पूरी होना जरूरी है।
हालांकि इसे लेकर 2016 में परीक्षा देने के बाद काउंसलिंग और पोस्टिंग से टले आवेदक कोर्ट में गए और अभी सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है, लेकिन पुराने दस शिक्षकों को भी इस आधार पर रोका जाना किसी के समझ नहीं आ रहा। इस पर परेशान शिक्षकों के मदद मांगने पर शिक्षक संघ राष्ट्रीय के जिलाध्यक्ष गमीरचंद पाटीदार, आशीष त्रिवेदी, जितेंद्र पानेरी, आशीष त्रिवेदी, राजेंद्र सेवक, यज्ञदत्त जोशी, मनीष पंचाल, परेश गर्ग शुक्रवार को डीईओ से मिले और बताया कि उदयपुर में ऑफलाइन आवेदन करने वाले शिक्षकों के स्थायीकरण आदेश जारी हो चुके है। केवल बांसवाड़ा में ही स्थायीकरण आदेश रोके गए हैं।
स्थायीकरण आदेश रोकना अन्याय
2013 की भर्ती प्रक्रिया के तहत शिक्षकों का ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करने और 2015 में नियुक्ति सीईओ जिला परिषद द्वारा देने के बाद न्यायालय से जुड़ा प्रकरण समाप्त हो चुका है। अब उन नियुक्ति को लेकर जब कोई वाद ही नहीं रहा, तो स्थायीकरण आदेश रोकना अन्याय है। -गमीरचंद पाटीदार जिलाध्यक्ष शिक्षक संघ राष्ट्रीय
ऑफलाइन आवेदन करने वाले सभी शिक्षकों के स्थायीकरण नहीं करने के निर्देश जिला परिषद से मिले। उसके अनुसरण में ही स्थायीकरण नहीं किया है। शिक्षक अपना पक्ष रख रहे हैं तो वस्तुस्थिति से डीईसी को अवगत कराया जाएगा और अनुमोदन होने पर आगे की प्रक्रिया करेंगे। -प्रेमजी पाटीदार डीईओ प्रारंभिक