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ड्यूटी के दौरान जवान की मौत पर पुलिस अधिकारी-कर्मचारी देंगे एक दिन का वेतन

3 वर्ष पहले
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ड्यूटी के दौरान किसी पुलिसकर्मी की मौत होने पर परिवार की आर्थिक मदद के लिए बांसवाड़ा पुलिस ने एक सराहनीय पहल की है। ऐसे हादसे पर अब पुलिस अधिकारी और कर्मचारी अपने एक-एक दिन का वेतन मृतक पुलिस कर्मी के परिजनों को आर्थिक सहयोग के रूप में देंगे। पुलिस विभाग की इस पहल से अब मृतक पुलिस कर्मी के परिवार को 15 लाख के करीब आर्थिक सहयोग मिल सकेगा।

एसपी कालूराम रावत ने बताया कि बीते महीनों जवानों की संपर्क सभा के दौरान इस बारे में चर्चा की थी। जिसके बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि ड्यूटी के दौरान जवान की मौत पर सभी पुलिस अधिकारी और पुलिस कर्मी अपने एक-एक दिन का वेतन मृतक के आश्रितों को सहयोग राशि के रूप में देंगे। इसके बाद 24 अप्रैल को खमेरा थाने के नरवाली पुलिस चौकी पर कार्यरत विभागीय काम से डाक लेकर जा रहा था कि रास्ते में सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई। जिस पर इस पहल के तहत परिवार को सहयोग राशि दी जाएगी। एसपी की यह पहल पूरे प्रदेश में अपने अाप में अनूठी है। जवानों का कहना है कि इससे पुलिस कर्मी और उनके परिवारों का हौसला बढ़ेगा। जिले में पुलिस विभाग की 1193 की नफरी है। इसके मुताबिक अधिकारी और जवानों के एक-एक दिन का वेतन मिलाकर करीब 15 लाख से ज्यादा सहयोग राशि होगी। एसपी अभी अपने एक दिन का करीब 5 हजार का वेतन सहयोग के रूप में देंगे। पुलिस कर्मियों की 1008 की स्ट्रेंथ है, लेकिन फिलहाल 900 कार्यरत है।

फैक्ट फाइल : पुलिस की नफरी

डीएसपी 05

इंस्पेक्टर 14

सब इंस्पेक्टर 54

एएसआई 83

हैड कानि. 54

कांस्टेबल 800

ग्राम विकास अधिकारी का काम अब दूसरे कर्मचारी नहीं कर सकेंगे

बांसवाड़ा/नवागांव| ग्राम पंचायतों में अब विभागीय अधिकारियों की मनमानी नहीं चलेगी। ग्राम विकास अधिकारी के रिक्त पदों पर केवल ग्राम विकास अधिकारी ही कार्यभार संभालेंगे। पंचायती राज शासन सचिव एवं आयुक्त कुंजी लाल मीणा के आदेशानुसार पूर्व में विकास अधिकारियों की ओर से मनमाने तरीके से बार-बार ग्राम विकास अधिकारी का चार्ज पंचायत प्रसार अधिकारी या पंचायत के ही कनिष्ठ सहायकों को सौंप दिया जाता था, जिससे ग्राम पंचायत के विकास के कार्य प्रभावित होते थे। सरकार के 4 अप्रैल 2017 को जारी आदेश अनुसार पहले भी इस तरह के आदेश पारित किए गए थे लेकिन उसकी पालना नहीं हो पा रही थी। जिस कारण पंचायत कार्मिकों में असंतोष फैला हुआ था।

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