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हमारे यहां निपाह वायरस का खतरा, क्योंकि कागदी पार्क में चमगादड़ों के बीच खेलते हैं बच्चे

3 वर्ष पहले
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केरल के कोझीकोड में चमगादड़ से फैलने वाले निपाह वायरस से 11 लोगाें की मौत की खबर ने बांसवाड़ा शहरवासियों की चिंता भी बढ़ा दी है। वह इसलिए कि यहां पर भी इन दिनों कागदी पिकअप वियर चमगादड़ाें का पार्क बना हुआ है। निपाह वायरस चमगादड़ों से फैलता है। ऐसे में इस पार्क के हर पेड़, डाली से लेकर तारों पर भी चमगादड़ों का बसेरा है। हजारों की तादाद में बसे इन चमगादड़ों में से कईयों की एकाएक मौत भी हुई है। जिससे पार्क में काफी बदबू फैल रही है। चमगादड़ों के कुतरे फल और खुद उन्हें भी कुत्ते नोंच रहे है। यहीं कुत्ते पार्क में घुमने आने वाले लोगों से भी संपर्क में आ रहे है। इतना ही नहीं यहां कई लोग नाश्ता तक भी करते है। ऐसे में अगर यह वायरस वाकई सक्रिय है तो इसे कागदी पिकअप वियर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तत्काल यहां एहतियातन बंदोबस्त करने की जरूरत है। पुणे वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट ने केरल के मामले में खून के तीन नमूनाें में निपाह वायरस होने की पुष्टि ने इस वायरस के तेजी से फैलने की आशंका और बढ़ा दी है। पक्षी विशेषज्ञ पहले ही कागदी पिकअप वियर पर चमगादड़ों के मरने और बड़ी तादाद में जमघट से बीमारी फैलने की आशंका जता चुके है। केरल में निपाह वायरस का असर सामने आने के बाद हमारे संवाददाता ने सोमवार को पार्क का जायजा लिया यहां पार्क में एक कुत्ता मरे चमगादड़ को नाेंच रहा था। वहीं दूसरा चमगादड़ों के कुतरे फल को खा रहा था। पास ही कुछ बच्चियां खेल रही थी। चमगादड़ों से लदे पेड़ के नीचे बैंच पर एक दंपती नाश्ता कर रहे थे। सभी इस खतरनाक वायरस की आशंका से अनजान थे।

निपाह वायरस के बारे में वो सब जो आप जानना चाहते हैं

संक्रमण से फैलता है निपाह

फ्रूट बैट या सूअर जैसे जानवर इसके वाहक हैं। संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने या इनके संपर्क में आई वस्तुओं के सेवन से निपाह वायरस का संक्रमण होता है। निपाह वायरस से संक्रमित इंसान भी संक्रमण को आगे बढ़ाता है।

लक्षण : 24 घंटे में कोमा में मरीज

सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार, जलन, सिरदर्द, चक्कर आना और बेहाेशी इस बीमारी के लक्षण हैं। डाक्टरों के अनुसार यह वायरस बहुत तेजी से असर करता है। मरीज को तुरंत इलाज न मिले तो 48 घंटे के अंदर वह कोमा में जा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इस वायरस का अभी तक वैक्सीन विकसित नहीं हुआ है। इलाज के नाम पर मरीजों को इंटेंसिव सपोर्टिव केयर ही दी जाती है।

भास्कर संवाददाता|बांसवाड़ा

केरल के कोझीकोड में चमगादड़ से फैलने वाले निपाह वायरस से 11 लोगाें की मौत की खबर ने बांसवाड़ा शहरवासियों की चिंता भी बढ़ा दी है। वह इसलिए कि यहां पर भी इन दिनों कागदी पिकअप वियर चमगादड़ाें का पार्क बना हुआ है। निपाह वायरस चमगादड़ों से फैलता है। ऐसे में इस पार्क के हर पेड़, डाली से लेकर तारों पर भी चमगादड़ों का बसेरा है। हजारों की तादाद में बसे इन चमगादड़ों में से कईयों की एकाएक मौत भी हुई है। जिससे पार्क में काफी बदबू फैल रही है। चमगादड़ों के कुतरे फल और खुद उन्हें भी कुत्ते नोंच रहे है। यहीं कुत्ते पार्क में घुमने आने वाले लोगों से भी संपर्क में आ रहे है। इतना ही नहीं यहां कई लोग नाश्ता तक भी करते है। ऐसे में अगर यह वायरस वाकई सक्रिय है तो इसे कागदी पिकअप वियर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तत्काल यहां एहतियातन बंदोबस्त करने की जरूरत है। पुणे वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट ने केरल के मामले में खून के तीन नमूनाें में निपाह वायरस होने की पुष्टि ने इस वायरस के तेजी से फैलने की आशंका और बढ़ा दी है। पक्षी विशेषज्ञ पहले ही कागदी पिकअप वियर पर चमगादड़ों के मरने और बड़ी तादाद में जमघट से बीमारी फैलने की आशंका जता चुके है। केरल में निपाह वायरस का असर सामने आने के बाद हमारे संवाददाता ने सोमवार को पार्क का जायजा लिया यहां पार्क में एक कुत्ता मरे चमगादड़ को नाेंच रहा था। वहीं दूसरा चमगादड़ों के कुतरे फल को खा रहा था। पास ही कुछ बच्चियां खेल रही थी। चमगादड़ों से लदे पेड़ के नीचे बैंच पर एक दंपती नाश्ता कर रहे थे। सभी इस खतरनाक वायरस की आशंका से अनजान थे।

कागदी से शहर में होती है पीने के पानी की सप्लाई

शहर में कागदी पिकअप वियर से ही पीने के पानी की सप्लाई होती है। जहां पर चमगादड़ों का बसेरा है वहां से ठीक सामने जलदाय विभाग की भूमिगत टंकी बनी हुई है। हाल ही कई चमगादड़ों की मौत हो चुकी है। जिसके पीछे विशेषज्ञ तापघात या फूडपाइजनिंग का असर होने के कयास लगा रहे हैं। कई मृत चमगादड़ पानी में गिरे थे। ऐसे में जीवाणुओं के पानी में फैलने की आशंका है हालांकि जलदाय विभाग के विशेषज्ञ बताते है कि पानी की मात्रा काफी ज्यादा है और पानी को दो अलग-अलग फिल्टर प्लांट में शुद्ध किया जाता है। जरूरी मात्रा में फिटकरी डाली जाती है। सारे जांच के बाद पानी की सप्लाई दी जाती है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।

कोई भी रोग जीवाणु या वायरस के संपर्क में आने से होता है। ऐसे में अगर चमगादड़ बांसवाड़ा में भी अधिकता में है तो उससे फैलने वाले नीपा वायरस से भी बचाव और एहतियाती बरतनी चाहिए। ऐसे जिंदा चमगादड़ों से कोई नुकसान नहीं है। फिर वह हमें छूता है या घाव करता है तो वायरस फैलने की आशंका बनी रहती है। बचाव के तौर पर हमें चमगादड़ों वाले क्षेत्र में कोई भी नीचे गिरा फल नहीं खाना चाहिए। बाजारों में सब्जी खरीदते हुए भी ऐसी कोई खरीदी नहीं करे जिससे किसी जानवर के काटे हुए निशान लगा हो। स्वास्थ्य विभाग को भी चाहिए कि ऐसे वायरस के असर को देखते हुए लोगों में जागरुकता के काम करे। इसके लिए विभाग और प्रशासन को पहल करनी होगी ताकि लोग रोगों से बच सके। डॉ. देवेश गुप्ता, एमडी, फिजिशियन

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