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भाेपे के इलाज से एक और बेटी संकट में

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा

भोपों और नीम हकीमों की ओर से इलाज के नाम पर मासूमों की जान से खिलवाड़ करने के कई मामले सामने आए है। इतना होने के बाद भी न तो जिला प्रशासन और न चिकित्सा विभाग जिले में ऐसे लोगों के कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। एमजी अस्पताल में 7 दिनों में ऐसे कई केस आ चुके हैं, जहां अंतिम मौके पर बच्चे केा डॉक्टर के पास लाया गया। शनिवार को एक और मामला सामने आया है। इसमें 10 महीने के बच्ची का 7 माह तक भोपों और नीम हकीमों से इलाज कराते रहे। फिर जब बच्चे की जान पर बनी तो परिजन उसे एमजी अस्पताल में लेकर आए। मामला बागीदौरा के पास करावाड़ा गांव की महिला काली प|ी नानू का है। उसने 10 माह पहले बच्ची कचरी को जन्म दिया। कचरी 3 माह की हुई उसके बाद से उसे बुखार और अन्य बीमारी होती रही। लेकिन शिक्षा के अभाव में परिजन भोपे के पास ले जाते रहे। कभी कभार आस पास में चल रहे नीम हकीमों के अस्पताल भी ले गए। भोपे ने बच्ची को झाड़फूंक और धागे बांध दिए। पीलिया होने का इलाज कराया जाता रहा। काली ने बताया कि शनिवार को बच्ची की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। तान आने लगी तो उसे लेकर बागीदौरा सीएचसी ले गए। वहां से भी डॉक्टर ने बांसवाड़ा ले जाने को कहा। शाम को गंभीर हालत में लेकर परिजन बांसवाड़ा आए। यहां पर कचरी की हालात गंभीर होने पर उदयपुर के लिए रैफर करने को कहा लेकिन परिजन उसे ले जाने को तैयार नहीं हुए। स्टाफ के अनुसार बच्ची को निमोनिया, तान, बुखार और जुकाम की बीमारी है। परिजनों का कहना है कि उदयपुर जाएंगे तो परेशान हो जाएंगे। वहा कौन संभालेगा।

10 महीने की बच्ची 7 माह से बीमार झाड़फूंक कराते रहे, गंभीर हालत में भर्ती
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