बांसवाड़ा। पहले भूखे को भोजन, इसके बाद भजन का संदेश
बांसवाड़ा। पहले भूखे को भोजन, इसके बाद भजन का संदेश देने वाले सिक्ख समाज की ओर से बैसाखी पर्व पर शहर के गुरुद्वारा श्रीगुरुसिंघ सभा में पाठ साहब के बाद शबद-कीर्तन के आयोजन किए। इसके बाद दोपहर से शुरू हुआ गुरु के अटूट लंगर का दौर शाम तक चला।
इससे पहले खालसा पंथ के स्थापना दिवस बैसाखी के उपलक्ष में यहां पिछले 48 घंटों से चल रहे पाठ साहब को शनिवार सुबह 11 बजे विराम दिया गया। इसके बाद ज्ञानी सुरजीतसिंह, माता तेजकुंवर और अशोक के रागी जत्थे के शबद-कीर्तन हुए। यहां पीयो पाहुल, खंडेदार होए जन्म सोहेला, वाहो-वाहे गोबिंदसिंह आपे गुरु-चेला...., खालसा अकाल पुरख की फौज, प्रगट्यो खालसा परमात्म की मौज... और अमृत पीयो सदाचीर जीओ, हर सिमरत अनद अनंता... जैसे शबद गायन का लाभ घंटों तक श्रद्धालु ने लिया। इसके उपरांत गुरु का अटूट लंगर पूरे शहर के समूह संगत ने चखा। इस बीच, गुरुद्वारा श्रीगुरु सिंघसभा के प्रधान इंद्रजीतसिंह के नेतृत्व में सेवादार दिनभर यहां आयोजनों की व्यवस्था में जुटे रहे। देर दोपहर बाद लोगों ने गुरुद्वारे में लंगर का वितरण किया। ज्ञानी सुरजीतसिंह ने बताया कि सिखों के दसवें गुरु गोविंदसिंहजी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्हीं की याद में यह पर्व मनाया जाता है। सिख धर्म का ध्येय पहले भूखे को भोजन उसके बाद भजन है। सिख समाज पूरी दुनिया में मानवता का संदेश देता है।