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संतान सुख की कामना के लिए भी लगाते हैं जंगल में आग

3 वर्ष पहले
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संतान सुख के लिए कई बार इलाज करवाना पड़ता है। कुछ लोग पूजा-हवन भी करवाते है। लेकिन प्रदेश के दक्षिणांचल स्थित आदिवासी बाहुल्य बांसवाड़ा में संतान सुख के लिए जंगल जलाए जाते हैं। पढ़कर आप चौंक जाएंगे लेकिन यह सच है। इसे स्थानीय भाषा में “डूंगरा हरगाना’ भी कहते है। जब इलाज का भी असर नहीं होता है तो संतान सुख के लिए सूखी पहाड़ियों की पूजा कर आग लगाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने पर डूंगरा माता आशीर्वाद देती है जिससे दंपती को संतान सुख की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि यहां के वनक्षेत्रों में हरसाल 50 से भी ज्यादा आग लगने की घटनाएं होती है। पिछले 40 दिनों में 25 से ज्यादा जंगल में आग लगने के मामले सामने आए हैं। अधिकारी खुद भी मानते है कि कई बार जंगल की आग के पीछे प्राकृतिक कारण नहीं रहे हैं लेकिन अब तक इसकी कोई पुष्टि भी नहीं हो पाई है। हमारे यहां सागवान वाले जंगल है। ऐसे में गर्मियों में पत्ते सूखने से प्राकृतिक कारणों से आग लगना आम है। कई बार वन सुरक्षा समितियों की आपसी खींचतान की वजह से आग लगाने की आशंका जताई जा चुकी है। कई वनक्षेत्र ऐसे है जहां जंगल में से पगडंडी निकलती है। ऐसे में किसी ग्रामीण के बीड़ी या सिगरेट फेंकने से भी आग लगने का डर बना रहता है। इन तीनों कारणों के अलावा चौथा कारण संतान सुख के लिए पहाड़ियों को जलाने का अंधविश्वास भी एक वजह बताई जाती है। सहायक वनसंरक्षक दिलीपसिंह बताते है कि कई बार जंगल में आग लगने के बाद ऐसा सुना है कि किसी खास मंशा के लिए पूजा कर आग लगाई जाती है लेकिन ऐसा सच में है यह पता नहीं।

अजीब मान्यता

लोगों का विश्वास है कि ऐसा करने पर डूंगरा माता आशीर्वाद देती है जिससे दंपती को संतान सुख की प्राप्ति होती है

1 लाख हैक्टेयर में फैला है हमारा जंगल

सागवान बाहुल्य जिले का जंगल 1 लाख हैक्टेयर में फैला है। बांसवाड़ा, डूंगरा, बागीदौरा, गढ़ी, कुशलगढ़ और घाटोल रेंज है। यहां सागवान के अलावा बांस, तेंदू और आम के पेड़ बहुतायात में हैं। हर साल तेंदू पत्ता संग्रहण से विभाग को लाखों का राजस्व मिलता हैं। इसके अलावा पैंथर, जरख, लोमड़ी और जंगली बिल्ली सरीखे मांसाहारी जीव भी यहां पाए जाते हैं।

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