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पता है कि पानी छोड़ते ही बह जाएगी, फिर भी माही बांध के गेट के पास 20 लाख से बना रहे सीढ़ियां
भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा/माहीडैम
माही बांध के डाउन स्ट्रीम में कराया जा रहा 20 लाख का काम विवादों में आ गया है। बांध के गेट से महज 250 मीटर की दूर दोनों किनारों पर 71 और 51 सीढ़ियों का निर्माण करवाया जा रहा है। इस काम को इतनी जल्दबाजी में शुरू किया गया कि इसकी डिजाइन तक स्वीकृत नहीं कराई गई। फाउंडेशन एंकरिंग करवाए बिना ही साधारण तौर पर सीढ़ियों का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया गया है। डाउन स्ट्रीम के एक किनारे पर तो सीमेंटेड ढलान पर ही सीढ़ियां बनाने का काम शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि माही के गेट खोलने के दौरान 4 से 5 लाख क्यूसेक प्रति सैकेंड की रफ्तार से पानी निकलता है। ऐसे में यह सीढ़ियां एक बहाव भी नहीं झेल पाएगी। पंचायत समिति बांसवाड़ा ने राज्य मंत्री धनसिंह रावत के क्षेत्र में राज्य वित्त आयोग के तहत 20 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। काम कराने के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि इससे रामगढ़, टामटिया आदि गांवों के लोगों माही बांध स्थल स्थित बाजार आने-जाने में आसानी होगी। साथी ही बांसवाड़ा व भूंगड़ा जाने में भी कम दूरी तय करनी होगी। क्योंकि पानी नहीं होने के दौरान वे सीढिय़ां उतरकर आसानी से डाउन स्ट्रीम पार कर सकेंगे। लेकिन लोगों को यह सुविधा मुश्किल से दो माह भी नहीं मिल पाएगी। क्योंकि जुलाई में तेज बारिश के साथ ही सीढ़ियों के बहने का खतरा बन जाएगा। क्षेत्र के ग्रामीण इस घटिया निर्माण का विरोध कर राज्य मंत्री धनसिंह रावत को भी शिकायत कर चुके हैं। इसके बाद बांसवाड़ा पंचायत समिति के बीडीओ खातुराम निनामा और तकनीकी अधिकारी सौरभ पंड्या वहां पहुंचे और लोहे का जाल बनाकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता में सुधार करने की हिदायत दी।
पहले भी टूट चुके हैं बांधों के डाउन स्ट्रीम में बनाए गए पुल
पहले भी माही बांध के डाउन स्ट्रीम में काफी मजबूत पुल का निर्माण किया गया था, जो माही बांध के 16 गेट खोलकर पानी छोड़ते ही टूट गया था। इसके बाद उस पुल से काफी आगे टामटिया रोड पर एक नए पुल का निर्माण करवाना पड़ा था। ऐसा ही दाहोद रोड पर बोरवट में मौजूद पुल के नीचे स्थित क्षतिग्रस्त पुल को देख कर सीख ली जा सकती है। पहली बारिश में सुरवानिया बांध के दस गेट खोल कर पानी छोड़ने और पनियाला नदी में पानी का तेज बहाव आने से वो पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद हाई फ्लड लेवल पुल का निर्माण किया गया था।
बिना ढांचा बनाए हो रहा काम
माही बांध की डाउन स्ट्रीम में डिजाइन स्वीकृत करवाए बिना मनमर्जी से सीढि़यों का निर्माण कार्य करवाया जा रहा है।
विशेषज्ञ बोले: नदी के जलबहाव क्षेत्र में ऐसा स्ट्रक्चर बनाना फिजूलखर्ची
जलसंसाधन विभाग के सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता और राजस्थान नदी बेसिन प्राधिकरण के पूर्व मुख्य अभियंता और वर्तमान राजस्थान नदी बेसिन प्राधिकरण में विशेष सलाहकार सदस्य दीपक दोसी ने बताया कि अंतरराज्यीय नदी बेसिन में किसी भी तरह का निर्माण कार्य जल संसाधन विभाग और केंद्रीय जल आयोग की स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता है। अगर इसे क्षेत्र के ग्रामीणों की सुविधा को ध्यान में रखकर किसी विशेष मद से बनाया जा रहा है, तो इसके लिए डिजाइन को फाउंडेशन एंकरिंग करवाकर फिर निर्माण कार्य प्रारंभ करवाना चाहिए, जिससे निर्माण कार्य लंबे समय तक जनोपयोगी साबित हो सके। यदि डिजाइन स्वीकृत नहीं है और काम जल संसाधन विभाग के मापदंडों के अनुरूप नहीं है, तो ये निर्माण कार्य बांध के गेट खोलने के साथ ही बह जाएगा जो फिजूलखर्ची ही साबित होगा।