धन होने से कोई धनी नहीं बनता
आपने ऐसे लोग बहुत देखे होंगे जो बहुत पैसेवाले होने के बावजूद गरीब जैसे रहते हैं। पुराने मैले कपड़े पहनेंगे, सस्ता सामान खरीदेंगे, न खुद खर्च करेंगे न बच्चों को करने देंगे।
ओशो कहते हैं, गरीब आदमी को अमीर भी बना दो तो भी वह अमीर नहीं हो पाता, गरीब ही रहता है। उसके सोचने, समझने, विचारने, जीने की शैली गरीब की होती है। इसीलिए तो तुम्हें धनी आदमियों में इतने कंजूस आदमी मिलते हैं। कंजूस का अर्थ क्या होता है? कंजूस का अर्थ होता है: बाहर तो धन है, मगर भीतर गरीबी की आदत है। बचपन से जो गरीब रहा है उस आदमी के पास अचानक बहुत सा धन आ जाए तो वह धनी नहीं बनता, धन को रोक लेता है। उसे खर्च करने की आदत ही नहीं है। एक ही आदत है कि पैसे को बचाकर रखना है। उनका आनंद कितने पैसे बचे इसमें होता है। उसके बच्चे अवश्य अमीर होते हैं क्योंकि उन्होंने बचपन से धन ही देखा है। वे अपने पिता को समझ नहीं पाते कि ये ऐसे कंजूस क्यों हैं?
हेनरी फोर्ड अमेरिका में फोर्ड कार के निर्माता थे जो बाद में बहुत अमीर बन गए। लेकिन जब भी वे लंदन जाते, होटल के सस्ते कमरे में रुकते। और उनके बेटे सबसे महंगा कमरा बुक करते। होटल के मैनेजर ने उनसे पूछा तो हेनरी फोर्ड ने कहा, ‹वे हेनरी फोर्ड के बेटे हैं, मैं एक गरीब बाप का बेटा हूं।› गरीबी की जकड़ गहरी है। पैसा न हो तो आदमी के विचार और भाव भी क्षुद्र रह जाते हैं। जब धन पर आप मुट्ठी बांधते हैं तो धन मर जाता है। धन तो जीवित रहता है अगर चले। सिक्का तो वही है जो चले; जिस पर मुट्ठी बंध गई वह मिट्टी हो गया। अच्छा होगा कि धन पाने के साथ-साथ व्यक्ति ध्यान भी करे तो अंतर और बाह्य रूप से धनी हो जाएगा।
लर्निंग
अमृत साधना
ओशो मेडिटेशन रिज़ाॅर्ट, पुणे
आपने ऐसे लोग बहुत देखे होंगे जो बहुत पैसेवाले होने के बावजूद गरीब जैसे रहते हैं। पुराने मैले कपड़े पहनेंगे, सस्ता सामान खरीदेंगे, न खुद खर्च करेंगे न बच्चों को करने देंगे।
ओशो कहते हैं, गरीब आदमी को अमीर भी बना दो तो भी वह अमीर नहीं हो पाता, गरीब ही रहता है। उसके सोचने, समझने, विचारने, जीने की शैली गरीब की होती है। इसीलिए तो तुम्हें धनी आदमियों में इतने कंजूस आदमी मिलते हैं। कंजूस का अर्थ क्या होता है? कंजूस का अर्थ होता है: बाहर तो धन है, मगर भीतर गरीबी की आदत है। बचपन से जो गरीब रहा है उस आदमी के पास अचानक बहुत सा धन आ जाए तो वह धनी नहीं बनता, धन को रोक लेता है। उसे खर्च करने की आदत ही नहीं है। एक ही आदत है कि पैसे को बचाकर रखना है। उनका आनंद कितने पैसे बचे इसमें होता है। उसके बच्चे अवश्य अमीर होते हैं क्योंकि उन्होंने बचपन से धन ही देखा है। वे अपने पिता को समझ नहीं पाते कि ये ऐसे कंजूस क्यों हैं?
हेनरी फोर्ड अमेरिका में फोर्ड कार के निर्माता थे जो बाद में बहुत अमीर बन गए। लेकिन जब भी वे लंदन जाते, होटल के सस्ते कमरे में रुकते। और उनके बेटे सबसे महंगा कमरा बुक करते। होटल के मैनेजर ने उनसे पूछा तो हेनरी फोर्ड ने कहा, ‹वे हेनरी फोर्ड के बेटे हैं, मैं एक गरीब बाप का बेटा हूं।› गरीबी की जकड़ गहरी है। पैसा न हो तो आदमी के विचार और भाव भी क्षुद्र रह जाते हैं। जब धन पर आप मुट्ठी बांधते हैं तो धन मर जाता है। धन तो जीवित रहता है अगर चले। सिक्का तो वही है जो चले; जिस पर मुट्ठी बंध गई वह मिट्टी हो गया। अच्छा होगा कि धन पाने के साथ-साथ व्यक्ति ध्यान भी करे तो अंतर और बाह्य रूप से धनी हो जाएगा।