दुनिया में पहली बार भारत में तैयार हुई डेंगू की दवा
नई दिल्ली | दुनिया में पहली बार भारतीय वैज्ञानिकों ने डेंगू के इलाज के लिए दवा विकसित कर ली है। इसका शुरुआती परीक्षण सफल रहा है। दवा को बाजार में लाने से पहले ग्लोबल स्टैंडर्ड के तहत क्लीनिकल ट्रायल किया जा रहा है। 2019 तक डेंगू के आम मरीजों के लिए दवा बाजार में उपलब्ध होने की उम्मीद है।
आयुष मंत्रालय के सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद (सीसीआरएएस) के वैज्ञानिकों ने सात तरह के औषधीय पौधों से यह दवा तैयार की है। इसमें एक दर्जन से अधिक वैद्यों (विशेषज्ञ) को दो साल से अधिक का समय लगा है। दवा का चूहों और खरगोश पर सफल परीक्षण करने के बाद पायलट स्टडी के तौर पर गुड़गांव के मेदांता अस्पताल, कर्नाटक के बेलगांव और कोलार मेडिकल कॉलेज में भर्ती डेंगू के 30-30 मरीजों को दवा दी गई। इसमें देखा गया कि दवा देने के बाद मरीजों के ब्लड में प्लेटलेट्स की मात्रा जरूरत के अनुसार बढ़ती गई। 90 मरीजों को काढ़ा बनाकर दवा दी गई। खास बात यह है कि किसी भी मरीज पर साइड इफेक्ट नहीं हुआ। सीसीआरएएस अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईसीएमआर) के साथ बेलगांव और कोलार मेडिकल कॉलेज में क्लीनिकल ट्रायल कर रहा है। तीन स्तर पर होने वाला क्लीनिकल ट्रायल सितंबर 2019 तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद परिणाम का विश्लेषण किया जाएगा। पहले मरीजों को काढ़े के तौर पर दवा दी गई थी, लेकिन अब टैबलेट के फॉर्म में दी जा रही है। इसका डोज सात दिन का है, जिसमें दिन दो बार एक-एक टैबलेट लेनी होगी। सीसीआरएएस के डीजी वैद्य प्रोफेसर के एस धीमान ने बताया, ‘क्लीनिकल ट्रायल के बाद प्रक्रिया के तहत टेक्नोलॉजी को उस कंपनी को ट्रांसफर किया जाएगा, जो दवा तैयार कर बाजार में लाने के लिए तैयार होगी।’
डेंगू से 5 साल में एक हजार से ज्यादा मौतें- भारत में पिछले 5 साल में डेंगू से एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 2014 के बाद से इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल डेंगू से देश में 250 लोगों की मौत हुई थी।
वर्ष------मरीजों की संख्या-----मृतक संख्या
2013----- 75,808------------- 193
2014----- 40,571------------ 137
2015----- 99,913------------ 220
2016----- 1,29,166---------- 245
2017----- 1,57,220--------- 250