आगरा के जौनई गांव के रहने वाले बलदेव और उनके बेटे सुदेश ने 2 मई को मौत को बहुत करीब से देखा है। बलदेव सिंह बताते हैं कि वो गांव से आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के लिए निकले थे। गांव से डेढ़ से 2 किमी सड़क पर थे तभी तेज तूफान आ गया। उनकी गाड़ी धीमी हो गई। बगल से एक टैंकर जा रहा था। देखते ही देखते टैंकर उनकी कार पर पलट गया। एकदम से तो समझ ही नहीं आया क्या हो गया। अांखों के सामने अंधेरा छा गया। सुदेश चिल्लाने लगा लेकिन कोई हमारी सुनने वाला नहीं था। दबाव की वजह से कार के शीशे टूट गए थे। किसी तरह सामने की तरफ से हम बाहर निकले। काफी देर तक हम सड़क के किनारे दुबके रहे। हम लोगों को काफी चोट आ गई थी। सुदेश का पैर टूट गया था और मेरे सिर पर चोट लगी थी। जब तूफान शांत हुआ तो चोट भूलकर हम गांव में लौटे।
जहां हाहाकार मचा हुआ था। मेरे घर का एक हिस्सा भी ढह गया था। फ़िलहाल हमें चार दिन पहले अस्पताल से छुट्टी मिली है। मुआवजा जो मिला उससे घर का काम शुरू करवाया है। लेकिन पूरी गाड़ी ध्वस्त हो गई। अभी वह कंपनी वाले ले गए हैं।
कहर : 150 साल पुराना पीपल उखड़ गया, दब कर हुई मौत
बरखेड़ा निवासी कल्याण सहाय का 27 वर्षीय पुत्र राकेश जांगिड भिवाड़ी में एक फैक्ट्री में काम करता था। साप्ताहिक अवकाश पर 2 मई को घर आया था। शाम को सब्जी लेने अलवर में घंटाघर के पास सब्जी मंडी पहुंचा और हादसे का शिकार हो गया। घटना के बारे में घटनास्थल से कुछ मीटर दूर सब्जी बेच रहे 72 वर्षीय रूपनारायण ने बताया कि तूफान से मंडी में भगदड़ सी मच गई थी। राकेश पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा हो गया। तभी जबरदस्त तेज हवा के झौके से भारी भरकम पीपल का पेड़ उखड़ गया। राकेश दब गया। वह करीब एक घंटे तक फंसा रहा। काफी मशक्कत के बाद पेड़ के नीचे से निकाल उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।