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चुनावी साल में कीमतों के मुद्दे से बचने के लिए सरकार खरीदेगी 26 करोड़ किलो प्याज
सौरभ भट्ट .जयपुर| चुनावी साल में प्याज की कीमतों को कहीं विपक्ष मुद्दा नहीं बना ले इसलिए सरकार किसानों से 26 करोड़ किलो प्याज खरीदेगी ताकि बाजार में जब भी प्याज के दाम बढ़ने लगे सरकार अपना प्याज रिलीज कर इसकी कीमतों को काबू कर सके। प्याज की कीमतें देश में कई बार सरकारों का तख्ता पलट कर चुकी है। प्रदेश में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में प्याज को लेकर जनता के मिजाज को ठंडा रखने के लिए सरकार किसानों से 2 लाख 60 हजार मेट्रिक टन प्याज खरीदने जा रही है। इसके लिए किसानों को 6.18 रुपए प्रति किलो की दर से भुगतान किया जाएगा। प्याज के साथ 1.54 लाख मेट्रिक टन लहसुन की भी खरीद की जाएगी।
इसके लिए किसान को 32.57 रुपए प्रतिकिलो की दर से भुगतान किया जाएगा। यह खरीद 13 अप्रेल से 12 मई तक राजफैड के जरिए की जाएगी।
पिछले साल प्याज ने किया था परेशान
पिछले साल प्याज की कीमतों में काफी उठा पटक मची थी। साल की शुरुआत में किसान को प्याज की लागत का पैसा भी नहीं मिल पाया लेकिन बाद में स्टॉकिस्टों ने इसकी कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया। करीब पांच महीनों तक प्याज 45 से 60 रुपए किलो तक बिका। इस साल प्याज की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर चुनावों पर होगा। इसलिए सरकार पहले से ही इसकी तैयारियां करके चल रही है। हालांकि पिछले साल भी सरकार ने प्याज और लहसुन की खरीद के लिए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम लागू की थी। इसमें लहसुन के लिए 32 रुपए और प्याज के लिए 4 रुपए किलो का भाव तय किया गया। इस भाव पर किसानों ने 105 मेट्रिक टन लहसुन सरकार को बेचा लेकिन प्याज बेचने के लिए कोई किसान नहीं आया क्योंकि बाजार में किसानों को इससे कहीं ज्यादा भाव मिल रहा था।
इन जिलों में होगी खरीद : प्रदेश में जोधपुर, नागौर, सीकर, झुंझुनू, जयपुर और बीकानेर में राजफैड के जरिए प्याज की खरीद की जाएगी। वहीं कोटा, झालावाड़, बूंदी, बारां और प्रतापगढ़ में लहसुन खरीद केंद्र लगाए जाएंगे।