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गैजेट्स से बढ़ी दूरियां, पैरेंट्स से बात तक नहीं करते बच्चे, राजस्थान के स्कूल ने की अनोखी पहल

3 वर्ष पहले
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स्कूल ने पैरेंट्स को होमवर्क दिया- बच्चों के साथ खाना खाएं, मोबाइल की बजाय दादा-दादी के पास समय बिताने को कहें

पत्र में लिखा- बच्चों को श्रम का महत्व समझाएं

बच्चों के साथ लंच, डिनर करें। इन्हें खेती करने वालों और उनके काम के बारे में सिखाएं। खाना बर्बाद न करने की सीख दें।

भोजन के बाद अपनी प्लेट स्वयं धोने के लिए कहें। इससे वे श्रम का महत्व समझेंगे।

सुबह और रात में अपना बिस्तर स्वयं बनाकर आपकी मदद करने के लिए कहें।

दादा-दादी से मुलाकात करें। बच्चों को उनके साथ समय व्यतीत करने के लिए प्रेरित करें। बच्चे के लिए उनका प्यार और भावनात्मक समर्थन महत्वपूर्ण है। उनके साथ तस्वीरें खिंचवाएं।

बच्चों को कभी-कभार अपने कार्यस्थल पर ले जाएं। बच्चे को यह समझने दें कि परिवार चलाने के लिए आपको कितनी कड़ी मेहनत करनी होती है।

बच्चे को अपने घर का उद्यान लगाने के लिए प्रोत्साहित करें। पेड़-पौधों का महत्व और उनके विकास का ज्ञान उनके विकास की प्रक्रिया एवं उनके जीवन का अंग है।

अपने बचपन की कहानियां, अपने संघर्ष और अपने परिवार के के बारे में बताएं।

बच्चों को कई बार घर के बाहर खेलने दें, उन्हें चोटिल और गंदा होने दें। उनके लिए गिरना और थोड़ी देर दर्द का अनुभव होना ठीक है।

कम से कम एक लोक गीत अवश्य सिखाएं। चाहे वह किसी भी भाषा का हो।

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