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11 साल में येद्दियुरप्पा के 5 फ्लोर टेस्ट; दूसरी बार नाकामी मिली

3 वर्ष पहले
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नवंबर 2007: जेडीएस का समर्थन लेने के बाद 8 दिन में ढह गई येद्दियुरप्पा सरकार

भाजपा के सहयोगी जेडीएस ने समर्थन वापस ले लिया था। 8 दिन में येद्दि सरकार ढह गई। छह महीने बाद चुनाव हुए। भाजपा को 110 सीट मिली। पर जादुई आंकड़े 113 से 3 सीटें कम रह गई थी।

जून 2008: भाजपा को सत्ता में लाने के लिए ‘ऑपरेशन लोटस’ लांच किया

येद्दियुरप्पा ने 8 निर्दलीय विधायकों के समर्थन से फ्लोर टेस्ट पास किया। इसके बाद येद्दि ने ‘ऑपरेशन लोटस’ लांच किया। 8 निर्दलीय विधायकों से इस्तीफा दिलाकर भाजपा से चुनाव लड़ाया। पांच सीट जीत ली।

2010 में 18 विधायकों ने सपोर्ट वापस लेकर सरकार को अल्पमत में ला दिया। इसमें 11 भाजपा के और 5 निर्दलीय थे। इससे फ्लोर टेस्ट की स्थिति फिर पैदा हो गई।

अक्टूबर 2010: 18 बागी विधायकों के अयोग्य घोषित होने से बच गई सरकार प्रोटेम स्पीकर केजी बोपैया ने 12 बागी विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया और येद्दि सरकार ने ध्वनिमत से फ्लोर टेस्ट जीत लिया। इस पर राज्यपाल भारद्वाज ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की।

भ्रष्टाचार के आरोप में कुर्सी चली गई

2011 में भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाना पड़ा। सीएम पद गया। 2015 में हाईकोर्ट ने बरी किया।

19 मई 2018: सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट का समय 48 घंटे कर दिया। पर नंबर न जुटने पर येद्दि ने फ्लोर टेस्ट से पहले ही हार मान ली।

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