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दलितों के खिलाफ दर्ज मामले विड्रो किए जाने से पहले कलेक्टर सुनेंगे परिवेदना

3 वर्ष पहले
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जयपुर | भारत बंद के दौरान दर्ज प्रकरणों को लेकर दलितों में उपजी नाराजगी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी कार्ययोजना बनाई है। जिसके तहत दो अप्रैल को जितने भी प्रकरण दर्ज किए गए उनकी समीक्षा की जाएगी। गंभीर मामलों को छोड़कर बाकी तमाम प्रकरण सरकार विड्रो करेगी। राज्य सरकार की ओर से गठित मंत्री मंडलीय उपसमिति की पहली मीटिंग से सरकार की कार्ययोजना पर काम भी शुरू हो गया। सरकार ने संभागीय आयुक्त एवं कलेक्टर को आगामी 30 जून तक सिफारिशें भेजने का समय दिया है। राज्य सरकार की ओर से गठित मंत्री मंडलीय उपसमिति में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री बाबूलाल वर्मा, राजस्थान हेरिटेज प्रोटेक्शन एंड डवलपमेंट ऑथोरिटी के चेयरमैन औंकार सिंह लखावत व एसीएस होम दीपक उप्रेती शामिल है।





समिति की पहली मीटिंग में निर्णय हुआ कि दो अप्रेल को सभी जिलों में दर्ज प्रकरणों को लेकर सामाजिक संगठनों एवं प्रतिनिधियों की परिवेदनााओं पर कलेक्टर सुनवाई करेंगे।

आगामी 31 मई तक लोग अपने परिवेदन इनके सामने रखेंगे। इस संबंध में कलेक्टरों को आदेश जारी किए जा रहे हैं ।

30 जून तक संभागीय स्तर पर रिपोर्ट बनेगी

सामाजिक न्याय मंत्री चतुर्वेदी के चैंबर में मंगलवार को हुई इस मीटिंग में तय हुआ कि परिवेदनाओं में जो मामले उठाए गए हैं उनके बारे में संभागीय आयुक्त एवं कलेक्टर संबंधित आईजी-एसपी से चर्चा करेंगे। उन्हें 30 जून तक यह सब निस्तारित कर अपनी रिपोर्ट समिति को भेजनी होगी। समिति तय करेगी कि किस तरह से प्रकरणों का निस्तारण करना है। तीन महीने यानी जुलाई के अंतिम सप्ताह में समिति की रिपोर्ट सरकार को जाएगी। इसके तत्काल बाद प्रकरणों को विड्रो करने की कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाएगा।

राजनीतिक नफा-नुकसान का आंकलन

राज्य सरकारें पहले भी आंदोलन से संबंधित प्रकरण विड्रो करती रही है। फिर यह प्रकरण दलितों से संबंधित है। इसलिए, कोई भी राजनीतिक दल इसके विरोध में खड़े होने की स्थिति में नहीं रहेगा। ऐसे में सरकार को ज्यादा दिक्कत आने वाली नहीं लगती है। भाजपा इसमें अपना फायदा देख रही है। दलितों को राजी करने में सरकार कामयाब रहती है तो पार्टी को इसका फायदा अगले चुनाव में मिल सकता है।

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