कॉल ड्राप से उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए सभी टेलीकॉम कंपनियों के लिए वॉयस ओवर लांग टर्म इवोल्यूशन (वोल्टी) टेक्नोलॉजी अनिवार्य की जा सकती है। टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई इसके लिए ड्राफ्ट पेपर जारी करने जा रहा है।
ट्राई के एक अधिकारी ने बताया कि सभी कंपनियों द्वारा वोल्टि टेक्नोलॉजी अपनाने पर कॉल ड्राप की समस्या आधी से भी कम रह जाएगी। कंपनियों को तय समय में वोल्टी टेक्नोलॉजी देशभर में मुहैया कराने के लिए कहा जा सकता है। अभी पूरे देश में वोल्टी टेक्नोलॉजी के माध्यम से कॉल की सुविधा सिर्फ जियो दे रही है। एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया धीरे-धीरे इस टेक्नोलॉजी का दायरा बढ़ा रही हैं। अधिकारी ने बताया कि अभी कॉलिंग के दौरान कई बार आवाज नहीं आती और अचानक कॉल ड्रॉप हो जाता है। वोल्टीटेक्नोलॉजी में यह समस्या नहीं आएगी।
मौजूदा और वोल्टी टेक्नोलॉजी में अंतर
टेक्नोलॉजी | प्रचलित तरीके से कॉल भेजने के लिए एक से दूसरे टावर के बीच लाइन सेट अप करना हो है। वोल्टी टेक्नोलॉजी में कॉल डेटा पैकेज के रूप में ट्रांसफर होता है।
नेटवर्क | प्रचलित माध्यम में डेटा और कॉल के लिए अलग नेटवर्क का इस्तेमाल होता है। वोल्टी टेक्नोलॉजी में दोनों एक ही नेटवर्क से भेजे जाते हैं।
स्पेक्ट्रम | प्रचलित तरीके की तुलना में वोल्टी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से स्पेक्ट्रम की कम खपत होती है।