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एक ही वक्त में मां, अभिभावक और गुरु : सीख एक ही... यह शिकारियों की दुनिया है, यहां इंसान भी रहते हैं

3 वर्ष पहले
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ये है बारबरी कपोटक (डव, ढूंढ़ाड़ी में कमेड़ी) जो अपने चूजे को सीख का दाना दे रही है। एसएमएस के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने मालवीय नगर के इस दृश्य को समाज के ताजा घटनाक्रमों के संदर्भों में समझा-जाना।

यह संवाद कुछ इस तरह है...

प्यारी मां, मैं भी अब आपकी तरह घोंसले से बाहर की दुनिया देख पाऊंगा...उड़ सकूंगा।

1

तेज आवाज में मत बोल। जमाना खराब है। हम जहां हैं वहां कई शिकारी नस्लें हैं। इंसान भी हैं, जो अपने ही बच्चे-बच्चियों से दरिंदगी कर जाते हैं।

2

ओह, मां। इतनी बुरी है दुनिया? ऐसी क्यों है बाहर की दुनिया?

3

ना ना! दुनिया बुरी नहीं, मगर इसमें बुराई है। संघर्ष है, जिनके लिए अभी तुम बहुत छोटे हो। मेरे पास आओ। दाना खाओ और संघर्षों के लिए तैयार हो जाओ

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