काजीखेड़ा में भागवत कथा शुरू, निकाली कलशयात्रा
कलेक्ट्रेट के पास ग्राम काजीखेड़ा में सोमवार को कलश यात्रा के साथ भागवत कथा शुरू हुई। जिसमें मुरलीधर भगवान के मंदिर से बैंडबाजों के साथ कलश यात्रा निकाली गई जो मुख्य मार्गों से होती हुई कथास्थल पहुंची। प्रथम दिन कथावाचक पंडित मुकुट बिहारी शास्त्री ने कहा कि जब बंशी वाले की कथा में बैठते हैं तो उसके कुटुम्ब के हो जाते हैं, लेकिन एक रिश्ता परमपिता से जुड़ जाता है। जब कभी अपनों से नहीं बन रही हो, तो इस अटूट रिश्ते को निभा लो। अपनी कमाई का कुछ अंश पुण्यार्थ में जरूर लगाओ। आनंद आकाश से बड़ा, कथा व्यथा से बड़ी और पुरुषार्थ पाप से बड़ा होता है। आधुनिक समय में असली-नकली फूलों को पहचाने में भूल कर रहे हैं, जबकि भंवरा असली फूल को पहचानने में कभी भूल नहीं करता। जहां सुगंध हो वहां पहुंचकर वह रस लेता है। अपने अन्त:करण को शुद्ध नहीं कर पाए। इसलिए असली तक नहीं पहुंच पाए। सांसारिक जीवन में जिसके पीछे दौड़ रहे हैं। यह प्लास्टिक के बनावटी फूल हैं। इनमें दिखावे की सुंदरता है, लेकिन इनमें सुगंध नहीं आ सकती। ग्रामवासियों ने बताया कि कथा समय 12 बजे से शाम चार बजे तक रहेगा। अशोक मीणा ने भागवत पूजन किया एवं भागवत कथा की आरती उतारी।
बारां.भागवत कथा से पूर्व सोमवार को निकाली गई शोभायात्रा।