बारां | शहर के तेल फैक्ट्री क्षेत्र स्थित निजी गार्डन में श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को कथावाचक गुरु मां ने कहा कि भक्ति जीवन में कर्म एवं धर्म को समाहित करके एक श्रेष्ठ मानव का विकास करती है।
उन्होंने राजा पृथु का वर्णन करते हुए कहा कि इन्होंने मानव समाज में कर्म एवं धर्म का विस्तार किया। रूढ़ीवादिता सोच बदल दें तो बहुत सारी शिक्षाएं आसपास ही जाती हैं। प्रहलाद ने कितनी बार अपने पिता हिरण्यकश्यप को धर्म का मार्ग समझाया और सिखाया, लेकिन हिरण्यकश्यप ने मृत्यु के पल में ही भूल को स्वीकार किया।
सत्संग से सही रास्ते पर चलने की शिक्षा मिलती है। गुरु मां ने भवाटवी के प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि जैसे गर्म पानी में चावल उबल जाते हैं, लेकिन कंकर नहीं उबलते, ऐसे ही जो आत्मस्वरूप को मन, कर्म और वचन से पूजा के संतुलन द्वारा साधना करके हासिल कर लेता है वह संसार के उद्वेगों से विचलित नहीं होता। भक्त ध्रुव ने मात्र छह माह में ही भगवान को प्रकट कर लिया था। भगवत भजन के लिए उम्र, जाति, भाषा या अन्य कोई वस्तु विचार बाधक नहीं है, बल्कि अविश्वास ही बाधक है। मंच संचालन बाबूलाल बंजारा, सुनील शर्मा, पुरुषोत्तम शर्मा, अनिल शर्मा ने किया। गोयल (रूई वाले) परिवार ने भक्तों को धन्यवाद दिया।
बारां.भागवत कथा के दौरान सजाई गई झांकी।