कस्बे के देवधाम सिद्धपीठ हनुमान मंदिर परिसर में स्थित सत्संग भवन में गुरुवार से श्रीमद् भागवत कथा की शुरुआत हुई। इससे पूर्व प्राचीन कालीमाता मंदिर से कथावाचक आचार्य बालेंद्र शास्त्री वृंदावन के सानिध्य में कलशयात्रा निकाली गई।
इसमें मुख्य यजमान मुरारीलाल धाकड़ ने श्रीमद्भागवत पुराण धारण किया व उनकी धर्मप|ी सरोज धाकड़ ने ताम्रकलश धारण किया। कलशयात्रा कस्बे के बंगलापुरा, खंगार बस्ती, कोटा-शिवपुरी रोड बस स्टैंड, मुख्य बाजार होते हुए देवधाम मंदिर परिसर पहुंची। कस्बे में ग्रामीणों ने जलपान, आरती, पुष्प वर्षा कर कलशयात्रा का स्वागत किया। इसके बाद भागवत कथा की शुरुआत हुई। जिसमें कथावाचक आचार्य ने कथा का महत्व समझाते हुए कहा कि भागवत का श्रवण करने से ही मनुष्यों का जीवन अज्ञानता से मुक्त होकर मुक्ति के मार्ग पर चलता है। मनुष्य जीवन में फैले अज्ञानता रूपी अंधकार को श्रीमद भागवत रूपी दीपक का प्रकाश नष्ट कर देता है।
अखंड हरिनाम संकीर्तन प्रारंभ
भंवरगढ़. घट्टी गांव में बंगाली समाज की ओर से महंत कृष्णदासदेव महंत की अगुवाई में गुरुवार सुबह से अखंड हरिनाम संकीर्तन प्रारंभ किया। यहां महायज्ञ स्थल पर दो-दो घंटे के अंतराल से स्थानीय एवं विभिन्न स्थानों से पहुंची भजन पार्टियां अखंड हरिनाम का जाप कर रही हैं। यहां सजाए गए पांडाल में गांवों से भी भक्त पहुंचकर हरिनाम का गुणगान कर रहे हैं। ग्रामवासियों की ओर से अष्टम प्रहर अखंड हरिनाम संकीर्तन महायज्ञ करवाया जा रहा है। आयोजन की शुरुआत 16 मई सुबह कलशयात्रा से हुई। आयोजन कमेटी के सदस्यों ने बताया कि कार्यक्रम के तहत बुधवार रात्रि को अधिवास एवं खोल पूजा हुई। कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को होगा।
देवरी. कस्बे में श्रीमद् भागवत कथा से पूर्व निकाली गई कलशयात्रा।
बारां. निजी गार्डन में चल रही भागवतक कथा में उपस्थित श्रद्धालु महिलाएं।
निजी गार्डन में भागवत कथा का मंगलाचरण
बारां. झालावाड़ रोड स्थित निजी गार्डन में चल रही श्रीमद भागवत कथा का गुरुवार को मंगलाचरण हुआ। गुरु मां ध्यानमूर्ति ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को मृत्यु का जतन जीते जी ही कर लेना चाहिए। संसार में मुक्ति मृत्यु का नाम नहीं है, बल्कि सत्य स्वरूप को पाना है। आत्मा और सद्बुद्धि के बीच मन में उठने वाले व्यर्थ के विचार एक दीवार की तरह खड़े रहते हैं। जिसके कारण धुंधकारी प्रेत जीवन में प्रकट रहता है। सत्संग से विचारधारा पवित्र हो जाती है। व्यक्ति हरिनाम से प्रेम करने लगता है और संसार के नाशवान बंधनों से छूट जाता है। भक्त विदुर और विदुरानी के घर भगवान ने जो केले के छिलके का भोग लगाया, उसकी झांकी सजाई गई।
संगीतमय सुंदरकांड में शामिल हुए श्रद्धालु
केलवाड़ा. विश्वकर्मा तिराहे पर सीताबाड़ी संगीत साधना परिवार द्वारा संगीतमय सुंदरकांड का आयोजन किया गया। जिसमें रात 11 बजे तक महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने सुंदरकांड का पाठ किया। प्रदीप खत्री की ओर से उनके पुत्र हर्षित के जन्मोत्सव पर यह पाठ करवाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तिभाव में डूबे श्रद्धालुओं ने रात 11 बजे तक कार्यक्रम में शामिल रहकर हनुमानजी महाराज का स्मरण किया। कार्यक्रम में सीताबाड़ी संगीत साधना परिवार के स्थानीय कलाकार अवनिंद्र वाजपेयी, रविकांत सोनी, गोपाल शाक्यवाल, गजेंद्र शर्मा, राजू ओझा सहित अन्य कलाकारों ने अपनी संगीतमय प्रस्तुति दी।