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पिछले साल से 4 हजार हैक्टेयर अधिक में लहसुन की खेती, पैदावार भी अच्छी...भाव औंधे मुंह गिरा

3 वर्ष पहले
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जिले में इस साल लहसुन की बंपर पैदावार होने के बाद बाजार में किसानों को लहसुन का अच्छा भाव नहीं मिलने से मुश्किल हो रही है। इस साल बारिश अच्छी नहीं होने के बावजूद पिछले साल की तुलना में 4 हजार 800 हैक्टेयर में लहसुन की पैदावार अधिक हुई है। पैदावार के चलते किसान खुश भी थे, लेकिन जैसे ही भाव कम मिलने लगा तो मायूस हो गए।

कई किसान तो भाव आने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन जो किसान कर्जदार हैं, जरूरतमंद हैं वह मंडी में औने-पौने दामों में ही लहसुन बेचने को मजबूर हैं। कृषि उपज मंडी बारां व छीपाबड़ौद दोनों ही जगह पर किसान को लहसुन का अच्छा भाव नहीं मिल रहा है। दोनों ही जगह पर 1000 से अधिकतम 1800 रुपए प्रति क्विंटल का ही भाव मिलने से किसान की लहसुन में लागत भी नहीं निकल रही है। इस साल जिले में कुल हैक्टेयर के रकबे में से अकेले लहसुन की बुवाई 44 हजार 800 हैक्टेयर में हुई है। जबकि पिछले साल 40 हजार 670 हैक्टेयर में ही लहसुन की खेती की गई थी और पैदावार भी कम हुई थी, लेकिन इस बार बंपर आवक होने के बाद किसान को कम भाव मिलने से अभी से ही चिंता सताने लगी है।

एक बीघा में 15 हजार का खर्च आ रहा है
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गांव से अच्छे भाव की उम्मीद लेकर किराए का ट्रैक्टर कर मंडी में लहसुन लेकर आए थे, लेकिन यहां आने पर 980 रुपए प्रति क्विंटल ही लहसुन बिका। इससे करीब पांच बीघा में लहसुन की फसल की थी। लागत भी नहीं निकलने से कर्ज हो गया है। मंडी में लहसुन का भाव नहीं मिलने से आर्थिक रूप से परेशानी हो रही हैं। -बाबूलाल बालापुरा, नाहरगढ़

बारां. कृषि उपज मंडी में शुक्रवार को बिकने आया लहसुन।

लहसुन की बुवाई से लेकर उसको तैयार कर बाजार में लाने तक किसान को प्रति बीघा पर 15 हजार रुपए का खर्च उठाना पड़ रहा है। इसमें एक बीघा में डेढ़ क्विंटल प्रति बीघा के हिसाब से बुवाई करने पर सात हजार रुपए का खर्च होने के साथ ही 8 बार पानी देने, उसकी खुदाई करवाने से लेकर बाजार में लाने तक करीब एक बीघा पर 15 हजार रुपए का न्यूनतम खर्चा आ रहा है। इसके बावजूद किसान की लागत भी नहीं मिल रही। वहीं, किसान महापंचायत के प्रदेश संयोजक सत्यनारायण सिंह ने कहा कि किसान वर्तमान बाजार भाव से तो घाटे में है। अगर किसान का लहसुन दो हजार रुपए प्रति क्विंटल तक जाएगा तभी किसान को फायदा मिलेगा। ऐसे में किसानों को मजबूरी में मंडी में औने-पौने दामों में लहसुन को बेचना पड़ रहा हैं।

लहसुन का उत्पादन ठीक है। कम बारिश के बावजूद अच्छी आवक हुई है, लेकिन मंडी में भाव नहीं मिलने से निराशा हो रही हैं। यहां पर 1560 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से ही लहसुन का बेचान होने से निराश हुई हैं। लेकिन परिवार में शादी विवाह होने से मजबूरी में लहसुन को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा हैं। किशनलाल बंजारा, देवपरियां मोठपुर

जिले में लहसुन को लेकर व्यापारियों के द्वारा किसानों को अच्छे भाव नहीं दिए जा रहे हैं। सरकार की ओर से भी किसानों से समर्थन मूल्य पर लहसुन की खरीद अब तक शुरू नहीं की गई है। शुक्रवार को भाड़ा लगाकर लहसुन बेचने के लिए आए, लेकिन 760 रुपए प्रति क्विंटल ही लहसुन बिका इससे निराशा हुई। हनुवंत लोधी, सीगरी

मंडी में लहसुन की बंपर आवक होने के बाद भी किसानों को वाजिब दाम नहीं मिल रहा है। शुक्रवार को कृषि उपज मंडी में तीन अलग-अलग वैरायटी का लहसुन लेकर आए, लेकिन एक भी क्वालिटी के लहसुन का 1000 हजार से अधिक का भाव नहीं मिला। सभी तरह के लहसुन में से कोई 750, 250 व 300 रुपए प्रति क्विंटल ही बिका। -कुंजबिहारी मेहर, टांचा छीपाबड़ौद

प्रति बीघा 10 क्विंटल की पैदावार
जिले में प्रति बीघा के हिसाब से लहसुन की 10 क्विंटल प्रति बीघा के हिसाब से पैदावार हुई हैं। जिले में 44 हजार 800 हैक्टेयर में पैदावार होने के चलते कुल 22 लाख 40 हजार क्विंटल की बंपर पैदावार हुई है। इसके चलते ही पिछले साल की तुलना में इस बार भाव भी घटकर आधा ही रह गया हैं। पिछले साल जहां किसान काे प्रति क्विंटल के हिसाब से दो हजार से लेकर पांच हजार प्रति क्विंटल तक भाव मिला। लेकिन इस बार किसान को शुरूआत में ही भाव अच्छा नहीं मिलने से मायूस होना पड़ रहा है। इसके चलते गुरुवार को छीपाबड़ौद में तो एक किसान भाव अच्छा नहीं मिलने से एक ट्रॉली लहसुन को सड़क पर ही फेंककर चला गया।

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