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1 साल में सिर्फ 15 आंगनबाड़ी भवन बने, 73 बनाए जाने थे

3 वर्ष पहले
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जिले में 1544 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 400 केंद्र किराए के भवन में संचालित हैं। इससे केंद्रों पर आने वाले बच्चों के साथ कार्यकर्ताओं को भी केंद्र का संचालन व अन्य गतिविधियां कराने में जगह के अभाव में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके चलते 2016-2017 में मनरेगा योजना व महिला बाल विकास विभाग के आपसी सहयोग से 73 जगह पर केंद्रों के भवन निर्माण के लिए 5 करोड़ 11 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। इसमें से प्रत्येक पर सात लाख, पांच लाख मनरेगा व दो लाख रुपए महिला बाल विकास विभाग के सहयोग से दी गई थी, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी अब तक 73 में से 15 केंद्रों का निर्माण ही हो पाया है। इसके चलते किराए के भवन में संचालित केंद्रों पर आने वाले बच्चों व कार्यकर्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मनरेगा योजना से 5 व महिला बाल विकास से एक केंद्र के निर्माण के लिए मिले थे 2 लाख, दोनों विभागों की ओर से निर्माण कार्य को नहीं लिया जा रहा गंभीरता से
मनरेगा व महिला बाल विकास से बने रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के कार्य को जल्द पूरा करने के लिए सभी ग्राम विकास अधिकारी को बार-बार नोटिस देकर निर्देश दिए गए हैं। इसमें मनरेगा से काम होने के कारण श्रमिक नहीं मिलने से भी परेशानी हो रही है, लेकिन अब दो माह के अंदर केंद्रों का काम पूरा नहीं होने पर संबंधित ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - मथुरालाल मीणा, एक्सईएन, जिला परिषद बारां

किराए के भवन में किराया भी दो और सुविधाएं कुछ नहीं
किराए के भवन में संचालित केंद्रों के अपने भवन बनने के बाद आने वाले बच्चों व कार्यकर्ताओं को बेहतर सुविधा मिलेगी। मनरेगा योजना में सरपंचों के रूचि नहीं लेने के कारण अब तक धीमी गति से चल रहे कार्य के चलते किराए के भवन में संचालित केंद्रों पर आने वाले बच्चों को खुद का भवन मिलने में देरी हो रही है। अगर दोनों विभागों द्वारा भवन निर्माण में तेजी से कार्य किया जाता तो एक साल से कछुआ चाल से चल रहे भवनों का काम कभी का ही पूरा हो जाता।

बारां ब्लॉक में 5 में से 1 ही केंद्र बना
मनरेगा व महिला बाल विकास विभाग की ओर से संयुक्त राशि से छह ब्लॉक में 73 केंद्र बनाने थे, लेकिन इसमें से अभी तक एक साल में 15 ही केंद्रों का काम हो पाया है। इसमें अंता ब्लॉक में 16 बनाने थे यहां पर छह का काम पूरा हुआ है। वहीं बारां ब्लॉक में पांच में से एक, अटरू ब्लॉक में छह में से दो, किशनगंज में 22 में से एक, छबड़ा में 15 में से चार व शाहबाद में आठ आंगनबाड़ी केंद्र बनाने थे, लेकिन यहां पर एक केंद्र का काम भी पूरा नहीं हो पाया है।

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