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3 कांटों पर ही गेहूं की सरकारी खरीद मंडियों में कम भाव पर बेच रहे किसान

3 वर्ष पहले
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जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद के लिए तयशुदा 13 केंद्रों के मुकाबले सिर्फ 3 केंद्र ही शुरू किए गए हैं। ऐसे में किसानों को मंडी में खुले में गेहूं बेचना पड़ रहा है। इसमें एक क्विंटल पर 100 से 150 रुपए तक का नुकसान हो रहा है। वहीं, सरकारी खरीद शुरू होने की उम्मीद में गेहूं लेकर केंद्र पर पहुंचे किसान को तीन दिन इंतजार के बाद खुले में मंडी में गेहूं बेचना पड़ा। किसानों का कहना है कि सरकार ने सिर्फ घोषणा कर दी, राहत के नाम पर कुछ नहीं मिला।

जिले में राज्य सरकार की ओर से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद के लिए केंद्र नहीं बढ़ने से किसानों के सामने संकट खड़ा हो रहा है। कलेक्टर की अध्यक्षता में बार-बार बैठक होने, कृषि मंत्री के बार-बार निर्देश देने के बाद भी अब तक 13 में से 3 ही खरीद केंद्र शुरू हो पाए हैं। इसके चलते मंडी में रोजाना गेंहूं की हो रही बंपर आवक के बाद किसानों को समर्थन मूल्य से कम दाम में ही खुले में गेहूं बेचना पड़ रहा है।

जिले में एफसीआई, राजफेड व तिलम संघ के माध्यम से गेहूं की खरीद की जानी थी, लेकिन अब तक केंद्र खोलने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से महज अंता, सीसवाली व मांगरोल में ही खरीद केंद्र शुरू हो पाए हैं। जिसके चलते किसानों को प्रति क्विंटल पर 100 से 150 रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा हैं। जबकि गेहूं की सरकारी खरीद के लिए 15 दिन पहले ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसान बारां, छबड़ा व अटरू में अभी भी खरीद केंद्र शुरू करने के इंतजार में रोजाना मंडियों के सरकारी खरीद केंद्र पर चक्कर काट रहे हैं। लेकिन इन केंद्रों पर अभी सिर्फ जल्द खरीद शुरू करने का ही आश्वासन किसानों को मिल रहा है।

15 दिन पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, फिर भी बारां-छबड़ा-अटरू में तुलाई शुरू नहीं
बारां. कृषि उपज मंडी स्थित खरीद केंद्र पर गेहूं खरीद केंद्र की जानकारी लेते किसान।

3 दिन इंतजार के बाद मंडी में बिका गेहूं: किसान हरपाल
शहर के फल सब्जी मंडी में राजफेड की ओर से चल रहे सरकारी खरीद केंद्र पर ही गेहूं की खरीद 10 अप्रैल से शुरू होनी थी। इसको लेकर किशनगंज क्षेत्र के सोडाना निवासी हरपाल करीब 400 क्विंटल गेहूं लेकर आ गया। दो दिन तक खरीद केंद्र पर ही गेहूं का ढेर पड़ा होने के बाद शनिवार तक खरीद केंद्र शुरू नहीं होने पर मंडी में जाकर व्यापारी से संपर्क कर गेहूं को बेचना पड़ा। किसान हरपाल ने बताया कि 7 अप्रैल को ऑनलाइन आवेदन करने के बाद 10 अप्रैल को तोल केंद्र कार्मिक ने गेहूं लेकर बुलाया गया। किसी कारण से केंद्र चालू नहीं हो पाया। इसके बाद दो दिन तक इंतजार करने के बाद शनिवार को समर्थन मूल्य से 85 रुपए का घाटा खाकर मंडी में व्यापारी को जाकर 1651 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं बेचना पड़ा।

हरपाल सिंह।

बारां. खरीद केंद्र शुरू नहीं होने से पहले ही बुलाए गए किसान के गेहूं का लगा ढेर।

समिति जीएम बोले-खरीद केंद्र शुरू करने की परमिशन नहीं मिली
अभी जिला मुख्यालय समेत छबड़ा व अटरू में गेहूं के खरीद केंद्र शुरू करने के लिए परमिशन नहीं मिली। किसान हरपाल को नहीं बुलाया गया। किसी से केंद्र पर आकर पूछा होगा तो उसने कह दिया होगा कि केंद्र शुरू होगा। किसान को मैसेज आने के बाद ही जिंस को खरीद केंद्र तक लाना चाहिए। फिर भी राजफैड को दिए तीनों केंद्रों को जल्द शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। सौमित्र मंगल, महाप्रबंधक, क्रय-विक्रय समिति बारां

रकबा-उत्पादन

बुवाई एक लाख 1 हजार 465 हैक्टेयर

खिंचाई: बाजार में गेहूं बिक जाएगा, क्या तब खोलेंगे केंद्र: सिंह
जिले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से इस साल सरकारी खरीद केंद्रों के माध्यम से 66 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा गया था। अभी 13 में से 3 केंद्रों पर ही खरीद हो रही है। ऐसे में सभी खरीद केंद्र शुरू नहीं होने से लक्ष्य के अनुसार खरीद हो पाना भी संभव नहीं। किसान महापंचायत के संयोजक सत्यनारायण सिंह ने कहा कि जब किसान पंद्रह दिन से लगातार सरकारी खरीद केंद्र का खुलने का इंतजार कर रहा है। जब गेहूं बाजार में ही बिक जाएगा तो किसान खरीद केंद्र पर गेहूं लाकर क्या करेगा।

राजफैड एमडी से मिला आश्वासन
शुक्रवार को भी एमडी वीणा प्रधान के सामने भी जिले के जनप्रतिनिधियों व किसानों ने जिले में गेहूं की खरीद के लिए घोषित केंद्रों को जल्द शुरू कराने की मांग की गई थी। एमडी प्रधान द्वारा भी जल्द केंद्र बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था। अब तक केंद्रों की संख्या नहीं बढ़ने से किसान परेशान हैं।

औसत उत्पादन 40 लाख 58 हजार क्विंटल

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