पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • 13 हजार हैंडपंप, 40 % खराब, मिस्त्री 55 रोज सुधारेंगे फिर भी सीजन निकल जाएगा

13 हजार हैंडपंप, 40 % खराब, मिस्त्री 55 रोज सुधारेंगे फिर भी सीजन निकल जाएगा

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
किशनगंज. क्षेत्र के पींजना गांव में खराब पड़ा हैंडपंप।

भास्कर न्यूज | बारां

जिले में शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।

शहर व ग्रामीण क्षेत्र में जिन हैंडपंपों में पानी है, उन हैंडपंपों को जलदाय विभाग दुरुस्त नहीं करा पा रहा है। इसमें हैंडपंप मिस्त्रियों की कमी सबसे प्रमुख कारण है। जिले में ग्रामीण क्षेत्र में 11 हजार 884 व शहरी क्षेत्र में 1079 हैंडपंप हैं, लेकिन इनकाे दुरुस्त करने के लिए विभाग के पास महज 55 हैंडपंप मिस्त्री हैं। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्र में 40 फीसदी हैंडपंपों में पानी होने के बाद भी लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हैंडपंप दुरुस्त करने के लिए पंचायत समिति के माध्यम से पहले ही मिस्त्री लगा दिए गए थे, लेकिन जलदाय विभाग की ओर से उन मिस्त्रियों को भी विभाग ने वापस बुला लिया, जिसके कारण दिक्कत आ रही है। जलदाय विभाग के पास अभी ग्रामीण क्षेत्र में 11884 व शहरी क्षेत्र में 1079 हैंडपंप हैं। इनको सही करने के लिए विभाग के पास महज 55 मिस्त्रियों की ही व्यवस्था है। लेकिन विभाग ने 31 जुलाई के लिए हाल ही में 65 लोगों को लगाया है, लेकिन इनके द्वारा अब तक काम शुरू नहीं करने से राहत नहीं मिल पा रही है।

विभाग का तर्क: ग्रामीण क्षेत्र में मिस्त्रियों की कमी से दुरुस्त नहीं हो रहे हैंडपंप, जनप्रतिनिधि व आमजन की शिकायत: हर गर्मी यही परेशानी उठानी पड़ती है

पंचायत व विभाग के चक्कर काटते रहते हैं फरियादी

कई ग्राम पंचायतों में पीएचईडी की ओर से हैंडपंप तो लगा दिए, लेकिन पंचायत के पास हैंडपंपों को दुरुस्त करने के लिए मिस्त्री नहीं होने से इसकी शिकायत जलदाय विभाग के अधिकारियों को दी जाती है। सामग्री व अन्य उपकरणों के चक्कर में कई बार हैंडपंपों को दुरुस्त करने में देरी करने से पंचायत को लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ता है। इसके लिए आए दिन पंचायत समिति व जिला परिषद की बैठकों में भी पेयजल समस्या को लेकर अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों की नाराजगी का सामना करना पड़ता है। हालांकि कुछ अधिकार पंचायतों को भी दे रखे हैं, लेकिन पंचायत के पास मिस्त्री नहीं होने से वह हैंडपंप को दुरुस्त नहीं करा पा रहे हैं।

जिले भर में यह है स्थिति

11884

ग्रामीण क्षेत्र में हैंडपंप

पीएचईडी: 65 मिस्त्री लगाए काम पर

पीएचईडी के एसई गोपेश गर्ग ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में लगातार हैंडपंप खराब होने की मिल रही शिकायतें व विभाग के पास मिस्त्रियों की कमी के चलते अब विभाग की ओर से हैंडपंपों को दुरुस्त करने के लिए अलग-अलग डिवीजन के लिए 65 लोगों को काम पर लगाया है, जाे 31 जुलाई तक अपने-अपने ब्लॉक में रहकर हैंडपंप दुरुस्त करने का कार्य करेंगे। वहीं इसकी रोजाना रिपोर्ट जिला मुख्यालय पर मंगवाई जाएगी।

किशनगंज में भी समस्या: हैंडपंप खराब होने के बाद दुरुस्त नहीं होने से ग्रामीणों को पेयजल समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बांसथूनी, हीरापुर, पींजना, लक्ष्मीपुरा, सुंडा, जनकपुर, जैतपुरा, माधोपुर, खेरुना व प्रेमपुरा गांवों में तो हैंडपंप के अंदर पानी होने के बावजूद भी जलदाय विभाग की ओर से इनको दुरुस्त नहीं कराने से परेशानी हो रही है।

1079

शहरी क्षेत्र में हैंडपंप

55

मिस्त्री हैं विभाग के पास हैंडपंप की मरम्मत को

जिले में पानी होने के बावजूद प्यासे हैं लोग

जिले में 40 फीसदी हैंडपंप ऐसे हैं, जिनमें पानी होने के बावजूद भी उनको दुरुस्त नहीं कराने से ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को पेयजल समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अगर विभाग की ओर से गर्मी के सीजन से पहले ही अतिरिक्त कर्मचारी लगाकर इन हैंडपंपों को दुरुस्त करवा दिया जाता तो गांवों में लोगों को पेयजल संकट का सामना नहीं करना पड़ता। किसी हैंडपंप में पाइप नहीं हैं तो किसी में पानी खींचने का डंडा ही क्षतिग्रस्त है तो कहीं पर रोड निर्माण के दौरान ही हैंडपंप को अंदर दबा दिया, जिसके चलते पानी होने के बावजूद भी ग्रामीणों को पेयजल समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

खबरें और भी हैं...