खेती में रासायनिक खाद का प्रयोग बंद करना अब समय की मांग होती जा रही है। किसान यह समझने लगे हैं कि इसके प्रयोग से जहां पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है वहीं खेतों की उर्वरा शक्ति भी नष्ट हो रही है। जागरूकता के चलते अब किसानों का मोहभंग रासायनिक खादों के प्रति होने लगा है। वर्मी कंपोस्ट बनाकर किसान खुद खाद तैयार करने लगे हैं। इस मामले में बरारी प्रखंड के कांतनगर के किसान जिले के लोगों के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं। विदित हो कि कांतनगर को जैविक कॉरिडोर घोषित कर दिया गया है।
अब तक इस पंचायत में किसानों ने 50 वर्मी कंपोस्ट इकाई बनाई है। सूबे के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने इसे कटिहार जिले का पहला जैविक ग्राम घोषित किया है। जो कि पूरे कोसी सीमांचल जिले के किसानों के लिए एक नजीर बन गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक इस पंचायत में प्रस्तावित 70 में से 50 वर्मी कंपोस्ट इकाई का निर्माण पशुपालको एवं किसानों द्वारा कर लिया गया है। साथ ही इस पंचायत को जैविक कॉरीडोर के रूप में भी विकसित करने की योजना पर विभाग की मुहर लग गई है।
जैविक खाद तैयार करने के लिए बनाया गया वर्मी कंपोस्ट।
गंगा का तटवर्ती इलाका जैविक खाद के लिए मुफीद
विदित हो कि गंगा के तटवर्ती इलाका होने के कारण कांतनगर सहित कई पंचायतों में सब्जी की खेती की संभावनाएं को देखते हुए संबंधित विभाग ने इस योजना को आगे बढ़ाया। किसानों को अनुदानित राशि पर वर्मी कंपोस्ट इकाई निर्माण करने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रखंड के प्रगतिशील किसानों की माने तो गंगा के किनारे सटे पंचायतों में अगर कृषि विभाग के द्वारा रासायनिक खाद के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक किया जाए तो आने वाले समय में गंगा के तटवर्ती इलाके में सब्जी की खेती पूर्ण रूप से जैविक खाद के द्वारा होगी। किसान विनोद यादव, अर्जुन मंडल, रविंद्र महतो, गणेश मंडल, श्रवण मंडल, सावित्री देवी, बसंती देवी, गीता देवी व लालमोहन महतो सहित अन्य किसानों ने कहा कि रासायनिक खाद के इस्तेमाल से खेतों की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही थी। लेकिन अब जैविक खाद ने हम लोगों की तकदीर बदल दी है।
प्रशिक्षण देकर किया जा रहा प्रोत्साहित
पंचायत के मुखिया का कहना है कि यहां के किसानों को जैविक खाद से जैविक खेती करने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। ताकि पूरे जिले में मेरा पंचायत नजीर बन सके। इधर कृषि पदाधिकारी महेंद्र राय का कहना है कि जैविक खाद बनाना बेहद सरल है। जिसको लेकर समय-समय पर शिविर लगाकर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। वर्मी कंपोस्ट के उत्पादन का तरीका काफी सरल व सुलभ है। इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी चंद्रदेव प्रसाद का कहना है कि बरारी में जैविक कॉरीडोर की शुरुआत हो चुकी है। कांतनगर में दो सप्ताह पूर्व कृषि मंत्री ने इसका शुभारंभ भी किया था। पूरा गांव जैविक खाद कॉरीडोर के रूप में स्थापित हो चुका है। किसान खुद खाद बना रहे हैं और उसका प्रयोग अपने खेतों में कर रहे हैं।