बरौनी| श्रद्धांजलि के लिए शहीद राजेश के आवास पर एक स्टेज को फूल माला से सजाकर उस पर राजेश का बड़ा तैलचित्र लगाया गया था। उसके आसपास राजनीतिक गैर राजनीतिक गणमान्य बैठे। कभी देश की बिगड़ती व्यवस्था तो कभी नक्सलवाद व अपराध पर आपस में चर्चा कर रहे थे। इसी बीच मंच के बगल में खेल रहे एक 6 साल एवं एक 4 साल के बच्चे को लोगों ने मंच को सजाए फूल माला को तोड़-तोड़ कर तैलचित्र एवं मंच पर बिखेरते देखा। कुछ लोग गुस्साए मुद्रा में वहां के कार्यकर्ताओं से उक्त बच्चे को भगाने का निर्देश देते हैं। लेकिन तभी दूसरी ओर से आवाज आती है नहीं, नहीं रहने दीजिए ये शहीद के पुत्र हैं। इसी बीच तपाक से उक्त बच्चे का भी जवाब आता है ‘ मैं कहीं नहीं जाऊंगा, मेरे पापा आ रहे हैं, मैं अपने पापा के लिए स्टेज सजा रहा हूं।’ इस बच्चे की आवाज सुनकर सभी अवाक। कुछ समय के लिए वहां का माहौल ध्वनि शून्य हो जाता है। लेकिन इससे बेफिक्र उक्त दोनों बालक फूल तोड़-तोड़ कर अपने पापा के लिए उक्त कथित मंच को सजाने में व्यस्त रहता है।
शहीद राजेश की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, नम आंखों से लोगों ने दी विदाई, स्कूल और बाजार रहे बन्द
हर जगह लोग कर रहे थे इंतजार
सिटी रिपोर्टर| बीहट
बीहट में आज एक हर लोगों की आंखें नम थी और जुबां पर जोश था। हजारों युवा आंखों में आंसू लिए भारत माता की जयकारा के साथ अपने शहीद को श्रद्धांजलि दे रहे थे। सबकी जुबां पर भारत माता की जय, शहीद राजेश अमर रहे। राजेंद्र पुल से लेकर शहीद राजेश के घर तक और राजेश के घर से लेकर चांदनी चौक, महात्मा गांधी उच्च विद्यालय, सीआईएसएफ मैदान और फिर सिमरिया धाम तक बस लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर निगाहें आज बरबस राजेश को देखने के लिए बेताब था।
शहीद राजेश छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स में था। यह गांव के लोग कम ही जानते थे, लेकिन जब उसके शहीद होने की खबर गांव तक आई तो गांव का हर व्यक्ति, हर बच्चा महिला-पुरुष उसके इंतजार में अहले सुबह से लेकर देर शाम तक टकटकी लगाए रहे। शहीद राजेश का घर, बीहट बाजार, सीआईएसएफ ग्राउंड हर जगह लोगों की भीड़ उसके दर्शन के लिए बेताब खड़ी थी।
सैकड़ों बाइक सवार युवाओं ने की शहीद के शव की अगुवानी
शहीद राजेश ने शायद ही सोचा होगा कि उसके शहीद होने पर उसके दर्शन के लिए लोग इतने व्याकुल होंगे। दिन के 11 बजे से ही लोग राजेंद्र पुल पर सैकड़ों बाइक के साथ हजारों युवा इंतजार कर रहे थे। घड़ी के जब 4.10 बजे तो राजेश का शव राजेंद्र पुल के रास्ते बीहट की ओर बढ़ चला। आगे-आगे बैंड बाजा पीछे हजारों युवा और फिर शहीद का कटआउट वाहन और उसके पीछे वाहनों की लंबी काफिला लग गई।
दहाड़ कर रोने लगी प|ी, मां और बहनें, लोगों ने संभाला
शहीद राजेश का शव ज्योंहि घर पर पहुंचा शहीद की प|ी स्वीटी दहाड़ मार कर रोने लगी। उसके पीछे शहीद की मां और चार बहनें भी उस भीड़ में बिलखती रही। ताबूत में पड़े शव के अंतिम दर्शन और शव से लिपटकर रोने की चाह ने हर परिजनों को गमगीन कर दिया। शहीद की प|ी, मां और बहनों को दर्शन के लिए लाया गया तो जगह ही नहीं बच पाई। चौकी पर रखे गए शव के दर्शन के लिए उमड़े लोगों के कारण लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े।
बीहट में सोमवार को हर एक की आंखें नम थीं और जुबां पर जोश था। हजारों युवा आंखों में आंसू लिए भारत माता के जयकारे के साथ अपने शहीद को श्रद्धांजलि दे रहे थे। सबकी जुबां पर भारत माता की जय, शहीद राजेश अमर रहे जैसे नारे थे। राजेंद्र पुल से लेकर शहीद राजेश के घर तक और राजेश के घर से लेकर चांदनी चौक, महात्मा गांधी उच्च विद्यालय, सीआईएसएफ मैदान और फिर सिमरिया धाम तक बस लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
बेटा : पापा आने वाले हैं...
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बड़े बेटे ने दी मुखाग्नि
शाम के करीब छह बजे शहीद राजेश का पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए सिमरिया गंगा घाट के लिए ले जाया गया। जहां उनके बड़े ऋषभ कुमार ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।
आक्रोशित लोगों ने स्कूल के मेन गेट में लगाया ताला
वहां शहीद के परिजनों ने मुआवजे की राशि की घोषणा के मुद्दे पर घेर लिया। लेकिन लगातार श्री सिन्हा केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रावधान की बात करते रहे। मामला बिगड़ता देख प्रभारी मंत्री पैदल ही अपने कुछ समर्थकों के साथ विद्यालय प्रांगण से बाहर निकलने लगे जिसके बाद आक्रोशित लोगों ने विद्यालय का मुख्य द्वार बंद कर प्रभारी मंत्री को अंदर ही रोक लिया और विरोध में नारेबाजी करते हुए हंगामा करने लगे। भाजपा नेता राम लखन सिंह ने लोगों को समझा-बुझाकर मंत्री को विद्यालय परिसर से प्रस्थान करवाया।
श्रद्धांजलि देने पहुंचे जनप्रतिनिधि
शहीद राजेश के पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि डीएम राहुल कुमार, एसपी आदित्य कुमार, एएसपी मिथिलेश कुमार, एएसपी अभियान अमृतेश कुमार, एसडीएम संजीव चौधरी, बीडीओ ओम राजपूत, सीओ अजय राज, बीहट नगर मैनेजर नागमणि सिंह ने दी। वहीं दूसरी ओर बिहार सरकार के जिला प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा, पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह, विधानपार्षद रजनीश कुमार, जदयू जिलाध्यक्ष भूमिपाल राय, पूर्व विधायक ललन कुंवर, अवधेश राय, भाकपा जिला मंत्री गणेश सिंह, भाजपा प्रदेश मंत्री रामलखन सिंह, बीटीएमयू के आशुतोष कुमार मुन्ना, ललन कुमार, रामरतन सिंह, नगरपरिषद बीहट के मुख्य पार्षद अशोक कुमार सिंह, पूर्व मंडल अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, बीएमएस जिला मंत्री सुनील सिंह, मजदूर नेता प्रह्लाद सिंह, शंकर शर्मा, आभा सिंह ,राजकिशोर सिंह, नन्दकिशोर सिंह, नारायण सिंह, राम नारायण सिंह, अरुण गांधी आदि ने श्रद्धाजंलि दी।
स्कूलों में दे दी गई छुट्टी: शहीद के सम्मान में स्कूलों में छुट्टी दे दी गई। शहीद का शव ज्योहीं चौक पर पहुंचा मध्य विद्यालय बीहट परिवार के प्रधान रंजन कुमार, ज्ञान भारती बीहट के अशोक कुमार, न्यू ईरा के संजय कुमार ललन, संस्कार गुरुकुल के रामकृष्ण के नेतृत्व में बच्चों ने पुष्प वर्षा की।
सीआरपीएफ मोकामा घाट और बीएमपी ने दी सलामी
शहीद राजेश के घर पर बिहार पुलिस की ओर से दो आठ सेक्शन की ओर से अमरनाथ राय के नेतृत्व में हवलदार गजेंद्र सिंह और विजय प्रसाद द्वारा सलामी दी गई। वहीं सीआईएसएफ ग्राउंड में स्थानीय खिलाड़ियों की उपस्थिति में सीआरपीएफ मोकामा घाट के जवानों द्वारा शहीद राजेश को सलामी दी गई। इस मौके पर सीआरपीएफ आईजीपी बिहार चारु सिन्हा, मोकामा घाट डीआईजीपी डी के त्रिपाठी, बरौनी इंस्पेक्टर गजेंद्र कुमार, प्रवीण कुमार, ओपी अध्यक्ष ज्योति कुमार, अजीत कुमार, सुनील कुमार सुमन सहित अन्य ने श्रद्धांजलि दी।
घटना से बेखबर बेटे फूल से सजा रहे थे पिता का मंच
बीहट| श्रद्धांजलि के लिए शहीद राजेश के आवास पर एक स्टेज को फूल माला से सजाकर उस पर राजेश का बड़ा तैलचित्र लगाया गया था। मंच के बगल में खेल रहे एक 6 साल एवं एक 4 साल के बच्चे को लोगों ने मंच को सजाए फूल माला को तोड़-तोड़ कर तैलचित्र एवं मंच पर बिखेरते देखा। कुछ लोग गुस्साए मुद्रा में बच्चे को वहां से हटाने का निर्देश दिया लेकिन तभी दूसरी ओर से एक ने कहा-नहीं, नहीं रहने दीजिए, यह शहीद का पुत्र है। इसी बीच तपाक से उक्त बच्चे का भी जवाब आता है-मैं कहीं नहीं जाऊंगा, मेरे पापा आ रहे हैं, मैं अपने पापा के लिए स्टेज सजा रहा हूं। घटना से अनजान छोटा बेटा ऋषिराज तैलचित्र के नीचे घुसने का प्रयास करने लगा तो बड़ा पुत्र ऋषभ उसे समझाता है कि बबुआ हैट जो, पप्पा आई जैथुन त गोसैथून। बच्चे के इस वार्तालाप से वहां मौजूद शायद ही कोई व्यक्ति होगा जिसकी आंखें नम ना हो गई हो।
शहीद के शव को कंधा देने के लिए लोगों का हुजूम जमा हो गया। कुछ लेाग इस पल को कैमरे में कैद कर रहे थे।
बिना राशि की घोषणा के ही वापस लौटे प्रभारी मंत्री पांच लाख की घोषणा पर परिजनों ने किया था विरोध
बीहट| शहीद के परिजनों को सरकार की ओर से दिए जाने वाले मुआवजे के राशि की घोषणाओं को लेकर घंटों चली हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद शाम के 6.40 बजे शहीद का पार्थिव शरीर को महात्मा गांधी उच्च विद्यालय बीहट से सिमरिया के लिए ले जाया जा सका। इसके पूर्व मौके पर पहुंचे प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा परिजनों के बीच 5 लाख मुआवजा की घोषणा से परिजन व ग्रामीण प्रभारी मंत्री पर भड़क उठे। शहीद की बहन रेणु देवी सहित अन्य लोगों का कहना था कि राकेश देश के लिए शहीद हुआ है। इतनी मुआवजे की राशि तो बस की छत से गिरकर मरने वालों को मिलती है। लोगों को गुस्से में देख प्रभारी मंत्री वहां से तुरंत प्रस्थान कर गए। वहां से महात्मा गांधी विद्यालय बीहट में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे।
बन्द रही बीहट चकिया की सभी दुकानें
कन्टेंट : कुंदन कुमार, मनोज कुमार झा, फोटो : सुमित कुमार।
प|ी : जाने कहां चले गए...