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डिजिटल लेनदेन घटने से समस्या बढ़ी, 70 हजार करोड़ कैश कम हुआ

3 वर्ष पहले
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एटीएम में पैसों की कमी पर विरोधाभासी बातें सामने आ रही हैं। सरकार और रिजर्व बैंक का कहना है कि नकदी की किल्लत नहीं है, वहीं एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक एटीएम खाली होने की वजह, 70,000 करोड़ रुपए की नकदी की कमी आना है। यह राशि देशभर के एटीएम से महीने भर में निकाली जाने वाली रकम के एक तिहाई हिस्से के बराबर है। रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल लेनदेन बढ़ने से नकदी की जरूरत को लेकर गलत अनुमान लगाया जाना इसकी मुख्य वजह है। मार्च में सिस्टम में 19.4 लाख करोड़ की नकदी होनी चाहिए। लेकिन 17.5 लाख करोड़ की नकदी ही मौजूद थी। यानी नकदी की जरूरत और उपलब्धता में 1.9 लाख करोड़ रुपए का अंतर रहा। वहीं, इस दौरान डिजिटल लेनदेन में खासी कमी दर्ज की गई।

दूसरी छमाही में एटीएम से 12.2% राशि ज्यादा निकाली गई

2017-18 की दूसरी छमाही यानी अक्टूबर 2017 से मार्च 2018 के बीच डेबिट कार्ड्स से 15,291 अरब रुपए निकाले गए। यह पिछली छमाही में निकाली गई राशि की तुलना में 12.2% अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार देश में इस समय नकदी का स्तर 17.84 लाख करोड़ है। यह नोटबंदी के समय के स्तर से अधिक है।

पिछले महीने आंध्र-तेलंगाना से शुरू हुई थी दिक्कत

पिछले महीने आंध्र और तेलंगाना में नकदी की कमी हुई थी। अफवाह थी कि बैंकों में पैसा सुरक्षित नहीं है। यह अफवाह प्रस्तावित फाइनेंशियल एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल 2017 की वजह से फैली। लोगों ने एटीएम से ज्यादा पैसे निकाले। विधेयक में बैंक के विफल होने की स्थिति उसे नुकसान से बचाने के लिए जमा राशि का इस्तेमाल करने का प्रावधान है।

इन वजहों से भी पैदा हुई कैश की किल्लत

चौथी तिमाही में इकोनॉमिक ग्रोथ में तेजी आने से एटीएम से ज्यादा पैसे निकाले गए।

कई बैंकों के एटीएम में 200 रु. के नोटों के आकार के हिसाब से बदलाव न होना।

बड़े मूल्य के नोटों के बजाय 200 और 50 रु. के नोटों की छपाई में तेजी लाई गई।

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