पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • जीवन को सुरक्षा देेने वाले युधिष्ठिर से कम नहीं

जीवन को सुरक्षा देेने वाले युधिष्ठिर से कम नहीं

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
मैंने राजा युधिष्ठिर के बारे में एक कहानी सुनी है। जब वे स्वर्ग के मार्ग पर जा रहे थे, तो सिर्फ एक कुत्ता उनके पीछे-पीछे आ रहा था। फिर देवताओं के राजा इंद्र एक रथ में आए और उन्हें उसमें सवार होने को कहा। लेकिन, युधिष्ठिर ने कहा कि कुत्ता उनके प्रति समर्पित रहा है और उसे भी साथ आने दें। इंद्र भगवान ने उनसे कहा, ‘आज आप मेरी तरह अमर हो गए हैं और आपने पूर्ण समृद्धि, ख्याति और स्वर्ग की खुशियां हासिल कर ली हैं। कुत्ते को यहीं छोड़ दीजिए।’

इस पर युधिष्ठिर ने कहा, ‘लोग कहते हैं कि आपके प्रति समर्पित किसी को त्याग देना ऐसी दुष्टता है, जिसकी सीमा नहीं। यह तो ब्रह्महत्या के बराबर है और मैं भी यही सोचता हूं।’ जब कुत्ते के रूप में खड़े धर्म देवता ने ये शब्द सुने तो वे अपने रूप में प्रकट हुए कहा, ‘हे महान राजा कुत्ते की स्वामी-भक्ति पर जोर देते हुए आपने स्वर्ग के रथ को भी ठुकरा दिया। आपने सशरीर स्वर्ग जाने का सर्वोच्च लक्ष्य हासिल कर लिया है।’

करुणा की यह पौराणिक कहानी मुझे तब याद आई जब मैंने एक लड़की के बारे में सुना जो यह भी नहीं जानती थी कि आप जब पालकों से दूर किसी अनजान जगह पर हों, जहां आपको यंत्रणा दी जा रही हो तब भी किसी भी फोन पर सिर्फ 100 नंबर पर कॉल लगाकर मदद प्राप्त कर सकते हैं। उसके आदिवासी पालकों ने पैसे के अभाव में उनकी बेटी को एक बिचौलिए को इस उम्मीद से सौंप दिया कि उसे उचित रोजगार मिल जाएगा और पैसे भी मिलेंगे। इसके बरसों बाद उसे पता चला कि वह तो देहरादून में है, जो छत्तीसगढ़ स्थित जशपुर जिले के उसके छोटे से गांव से मीलों दूर है।

उसने जब घर छोड़ा था तो वह सिर्फ 13 साल की थी। जब वह 21 वर्ष की हुई तो एक टीवी सीरियल ‘सावधान इंडिया’ ने उसे सिखाया कि मदद चाहिए हो तो वह 100 नंबर पर डायल करे। उसने इस नंबर पर कॉल किया और दुर्व्यवहार की अपनी कहानी सुनाई। फरवरी 2017 में उसे और उसकी तरह की अन्य 20 अन्य लड़कियों को बचाया गया। उन्हें पुणे के शासकीय विज्ञान आश्रम भेज दिया गया, जहां उन्होंने दो माह का बैकिंग कोर्स किया।

15 अगस्त 2017 को सारी 20 लड़कियां बिज़नेसवीमैन बन गईं। अब वे जशपुर जिले के कांसाबेल में अपनी बैकरी चला रही हैं। जिला व्यापार उद्योग ने उन्हें पांच लाख रुपए का लोन दिया और महिला व बाल कल्याण विभाग ने उन्हें डेढ़ लाख रुपए दिए। आज उस बैकरी को ‘बेटी ज़िंदाबाद बैकरी’ कहते हैं, जो रोज 1500 रुपए की कमाई करती है। जिन 20 लड़कियों ने बैकरी शुरू की थी, उनमें से दस की शादी हो गई हैं और वे इस गरीबी से ग्रस्त आदिवासी इलाके में देह व्यापार के खिलाफ अभियान की दूत बन गई हैं। आज कांसाबेल में बैकरी सुबह 7 बजे खुल जाती है और वहां हमेशा ग्राहकों की भीड़ रहती है।

वे बड़े स्व-सहायता समूह ‘’जीवन स्वास्थ्य समूह’ के तहत काम करती हैं, जिन्हें मार्च में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नारी शक्ति अवॉर्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्हें जीवन में सफल बनाने का श्रेय देहरादून के पुलिस दल, पुणे आश्रम के प्रशिक्षकों और जशपुर के जिला मजिस्ट्रेट को हैं, जिन्होंने राष्ट्र व उनके जीवन में आने वाले सरकारी अधिकारियों पर भरोसा दिखाने वाली इन युवा ज़िंदगियों को उचित मुकाम तक पहुंचाया।

मैंने राजा युधिष्ठिर के बारे में एक कहानी सुनी है। जब वे स्वर्ग के मार्ग पर जा रहे थे, तो सिर्फ एक कुत्ता उनके पीछे-पीछे आ रहा था। फिर देवताओं के राजा इंद्र एक रथ में आए और उन्हें उसमें सवार होने को कहा। लेकिन, युधिष्ठिर ने कहा कि कुत्ता उनके प्रति समर्पित रहा है और उसे भी साथ आने दें। इंद्र भगवान ने उनसे कहा, ‘आज आप मेरी तरह अमर हो गए हैं और आपने पूर्ण समृद्धि, ख्याति और स्वर्ग की खुशियां हासिल कर ली हैं। कुत्ते को यहीं छोड़ दीजिए।’

इस पर युधिष्ठिर ने कहा, ‘लोग कहते हैं कि आपके प्रति समर्पित किसी को त्याग देना ऐसी दुष्टता है, जिसकी सीमा नहीं। यह तो ब्रह्महत्या के बराबर है और मैं भी यही सोचता हूं।’ जब कुत्ते के रूप में खड़े धर्म देवता ने ये शब्द सुने तो वे अपने रूप में प्रकट हुए कहा, ‘हे महान राजा कुत्ते की स्वामी-भक्ति पर जोर देते हुए आपने स्वर्ग के रथ को भी ठुकरा दिया। आपने सशरीर स्वर्ग जाने का सर्वोच्च लक्ष्य हासिल कर लिया है।’

करुणा की यह पौराणिक कहानी मुझे तब याद आई जब मैंने एक लड़की के बारे में सुना जो यह भी नहीं जानती थी कि आप जब पालकों से दूर किसी अनजान जगह पर हों, जहां आपको यंत्रणा दी जा रही हो तब भी किसी भी फोन पर सिर्फ 100 नंबर पर कॉल लगाकर मदद प्राप्त कर सकते हैं। उसके आदिवासी पालकों ने पैसे के अभाव में उनकी बेटी को एक बिचौलिए को इस उम्मीद से सौंप दिया कि उसे उचित रोजगार मिल जाएगा और पैसे भी मिलेंगे। इसके बरसों बाद उसे पता चला कि वह तो देहरादून में है, जो छत्तीसगढ़ स्थित जशपुर जिले के उसके छोटे से गांव से मीलों दूर है।

उसने जब घर छोड़ा था तो वह सिर्फ 13 साल की थी। जब वह 21 वर्ष की हुई तो एक टीवी सीरियल ‘सावधान इंडिया’ ने उसे सिखाया कि मदद चाहिए हो तो वह 100 नंबर पर डायल करे। उसने इस नंबर पर कॉल किया और दुर्व्यवहार की अपनी कहानी सुनाई। फरवरी 2017 में उसे और उसकी तरह की अन्य 20 अन्य लड़कियों को बचाया गया। उन्हें पुणे के शासकीय विज्ञान आश्रम भेज दिया गया, जहां उन्होंने दो माह का बैकिंग कोर्स किया।

15 अगस्त 2017 को सारी 20 लड़कियां बिज़नेसवीमैन बन गईं। अब वे जशपुर जिले के कांसाबेल में अपनी बैकरी चला रही हैं। जिला व्यापार उद्योग ने उन्हें पांच लाख रुपए का लोन दिया और महिला व बाल कल्याण विभाग ने उन्हें डेढ़ लाख रुपए दिए। आज उस बैकरी को ‘बेटी ज़िंदाबाद बैकरी’ कहते हैं, जो रोज 1500 रुपए की कमाई करती है। जिन 20 लड़कियों ने बैकरी शुरू की थी, उनमें से दस की शादी हो गई हैं और वे इस गरीबी से ग्रस्त आदिवासी इलाके में देह व्यापार के खिलाफ अभियान की दूत बन गई हैं। आज कांसाबेल में बैकरी सुबह 7 बजे खुल जाती है और वहां हमेशा ग्राहकों की भीड़ रहती है।

वे बड़े स्व-सहायता समूह ‘’जीवन स्वास्थ्य समूह’ के तहत काम करती हैं, जिन्हें मार्च में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नारी शक्ति अवॉर्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्हें जीवन में सफल बनाने का श्रेय देहरादून के पुलिस दल, पुणे आश्रम के प्रशिक्षकों और जशपुर के जिला मजिस्ट्रेट को हैं, जिन्होंने राष्ट्र व उनके जीवन में आने वाले सरकारी अधिकारियों पर भरोसा दिखाने वाली इन युवा ज़िंदगियों को उचित मुकाम तक पहुंचाया।

फंडा यह है कि  जब आप किसी की ज़िंदगी को सुरक्षित बनाने का माध्यम बनते हैं तो कलयुग में आप धर्मराज युधिष्ठिर से कम नहीं हैं!

फंडा यह है कि  जब आप किसी की ज़िंदगी को सुरक्षित बनाने का माध्यम बनते हैं तो कलयुग में आप धर्मराज युधिष्ठिर से कम नहीं हैं!

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

खबरें और भी हैं...