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बरेली से खरगोन तक हाईवे किनारे की मिट्टी खोदकर भरे जा रहे हैं एनएच-12 के गड्‌ढे

3 वर्ष पहले
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जयपुर जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग 12 पर बरेली से लेकर खरगोन तक जर्जर हो चुकी सड़क के गड्‌ढे मिट्टी से भरे जा रहे हैं। खासबात यह है कि गड्ढे भरने के लिए हाईवे किनारे से मिट्टी खोदकर सड़क लेवलिंग की जा रही है। कंपनी द्वारा जेसीबी मशीन से सड़क के दोनों ओर खुदाई करके यह मिट्टी निकाली जा रही है और गड्ढों को भरा जा रहा है। जब कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर से इस संबंध में बात की तो जवाब मिला कि इसमें कोई गलत काम नहीं हो रहा। फिलहाल गड्ढे भरने के लिए ऐसा किया जा रहा है। बाद में ग्रेविल डालकर सड़क लेवलिंग की जाएगी। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि यदि कंपनी को फोरलेन सड़क का निर्माण करने के लिए बरेली से खरगौन तक मरम्मत करना ही है तो इसमें पहले से बनी सड़क की मिट्टी क्यों उठाई जा रही है। इसके साथ ही मिट्टी से गड्ढे भरने का क्या औचित्य है। जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग-12 से दिन-रात भारी वाहनों का आवागमन जारी है। मिट्टी के स्थान पर डामर और गिट्टी से इसकी मरम्मत करने से यह सड़क कुछ दिन और टिक सकती है, लेकिन मिट्टी से गड्ढे भरने के पीछे कंपनी की मंशा समझ में नहीं आ रही है, क्योंकि यह सड़क पहले ग्रामीण सड़क थी। जो कि आज एनएच 12 के नाम से जानी जाती है। इस सड़क का निर्माण जिला मार्ग की तरह किया गया था। इसे बनाने में लोकल मिट्टी की खुदाई ( बोरो पिट्स ) की गई थी। उसी काली मिट्टी के सबग्रेड का मुरमीकरण कर, ओवर साइज मेटल से डब्ल्यूबीएम कर डामरीकरण किया गया था। जिसका अपग्रेडेशन किया गया और इसे राष्ट्रीय राजमार्ग 12 का रुप दिया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग उपसंभाग औबेदुल्लागंज द्वारा इसकी बार-बार मरम्मत भी की जाती रही। लेकिन कमजोर सड़क हर बार भारी यातायात के दबाव में दम तोड़ती रही। खास बात यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिकारी भी इस समस्या के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को बता चुके है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में एक बार फिर बरेली से खरगोन के बीच मरम्मत का कार्य किया जा रहा है।

यातायात के अधिक दबाव के चलते खराब हो रहे मार्ग से यात्री हो परेशान

प्रोजेक्ट मैनेजर बोले-कुछ गलत नहीं, अभी भर रहे गड्‌ढे फिर करेंगे लेवलिंग

ठीक नहीं मिट्टी की गुणवत्ता, बारिश में धंसने की रहेगी आशंका

अधिकारियों ने बताया कि 40 साल पुराने इस मार्ग के निर्माण में स्थानीय मिट्टी का उपयोग किया गया है। सबग्रेड की काली ‘‘एक्सापॉसिव‘‘ मिट्टी अपनी स्वेलिंग एवं सिंकिंग (पानी सोखने की क्षमता) प्रापर्टी के कारण हर बार सड़क पर पड़ने वाले भारी दबाव को सहन नहीं कर पाती। जिससे बारिश और गर्मी में यह मिट्टी नीचे की ओर धंसक जाती है। ऐसे में एनएच से गुजरने वाले भारी वाहन सड़क पर फंसने लगते है और यातायात अवरुद्ध हो जाता है। साथ ही मार्ग के दोनों तरफ अधिकांश सिंचित क्षेत्र है जिससे यहां कृषि कार्य किया जाता है। लगभग आठ महीने खेतों में सिंचाई वाली फसल लगाई जाती है जिससे भूमि की आद्रता कम नहींं होती। जमीन में नमी लंबे समय तक बनी रहती है। यहां की मिट्टी की इस गुणवत्ता के कारण पुरानी पद्धति से बनाया गया जिला मार्ग जो कि वर्तमान में एनएच 12 के नाम से जाना जाता है टिक नहीं पाता।

एनएच 12 पर साइडों की मिट्‌टी खोदकर भरे जा रहे सड़क के गड्‌ढे।

किया जा रहा है भराव

बरेली से खरगोन तक लगभग 12 किमी की दूरी में सड़क की मरम्मत की जा रही है। फिलहाल मिट्टी सड़क किनारे से उठाई जा रही है और गड्‌ढों का भराव किया जा रहा है। बाद में ग्रेवल से लेवलिंग की जाएगी। सत्यनारायण, प्रोजेक्ट मैनेजर, डीएनसी

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