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23, 410 किसानों ने का पंजीयन पर एसएमएस के बाद भी राेज 15 किसान ही पहुंच रहे खरीदी केंद्र
अनुविभागीय क्षेत्र में समर्थन मूल्य पर चने की खरीदी सुस्त चाल से चल रही है। सभी केंद्रों पर किसानों की संख्या रजिस्ट्रेशन के लिहाज से काफी कम देखी जा रही है। समर्थन मूल्य पर की जा रही खरीदी की धीमी गति से प्रशासन के सामने असमंजस की स्थिति निर्मित हो रही है। जबकि चने की खरीदी के लिए पूरे अनुविभाग में कुल 23 हजार 410 किसानों ने समर्थन मूल्य पर चने की उपज बेचने के लिए पंजीयन कराया है। जिसमें से 8728 किसान बरेली, 2074 किसान बाड़ी और 12608 किसान उदयपुरा के हैं। इनमें से अधिकांश किसानों ने पहले यह पंजीयन भावांतर योजना के तहत उपज बेचने के लिए करवाया था। बाद में इन्हें समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिए मान्य किया गया है। जिन्हें प्रतिदिन एसएमएस भेजकर जानकारी दी जा रही है। इसके बावजूद भी किसानों का कम संख्या में आना प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक खरीदी केंद्र पर रोजाना करीब 70 किसानों को एसएमएस भेजकर सूचना दी जा रही है। इसके बावजूद भी मात्र 10 से 15 किसान ही खरीदी केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। जिससे उपार्जन प्रक्रिया गति नहीं पकड़ पा रही है। साथ ही केंद्रों पर प्रशासन द्वारा किए गए इंतजाम भी बेमतलब साबित हो रहे हैं। तौल कांटे, हम्माल, कंम्प्यूटर ऑपरेटर सहित सभी व्यवस्थाओं का पूरा उपयोग भी नहीं हो पा रहा है।
खरीदी केंद्रों पर नहीं आ रहे किसान : जानकारी के अनुसार पूरे अनुविभाग में समर्थन मूल्य पर चने का उपार्जन कराने के लिए 23 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है। शासन द्वारा लगभग 65 खरीदी केंद्र स्थापित किए गए हैं। जिन पर रोजाना किसानों की चने की उपज की तौल की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल यहां 10 से 15 प्रतिशत किसान ही पहुंचे हैं। जबकि 12 अप्रेल से खरीदी प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। इसके बावजूद भी किसानों की संख्या बहुत कम देखी जा रही है। सहायक आपूर्ति अधिकारी सतीष राय ने बताया कि किसानों को एसएमएस के भेजकर सूचना दी जा रही है। जिसमें संबंधित किसान बताया जा रहा कि वह अपनी उपज किस दिन उपार्जन केंद्र पर लेकर पहुंचे। बरेली तहसील में 9 हजार किसानों ने चने की उपज समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए पंजीयन कराया है। विपणन सहकारी संस्था द्वारा करीब 1600 किसानों का पंजीयन किया गया है। जिनमें से मात्र 10 प्रतिशत किसान ही चने की उपज लेकर पहुंचे हैं।