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बरेली, बाड़ी आैर उदयपुरा की तहसीलों में आगजनी से निपटने नहीं पर्याप्त संसाधन

3 वर्ष पहले
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गर्मी का सीजन शुरू होने के बावजूद भी आगजनी की घटनाओं से निपटने का कोई इंतजाम तहसील क्षेत्र में नहीं हैं। होशंगाबाद और भोजपुर विधानसभा क्षेत्रों की तीन तहसील ऐसी हैं जिनमें आगजनी की घटना से निपटने की सुविधा का अभाव रहा है। जबकि बरेली, बाड़ी और उदयपुरा तहसीलों में अनुविभागीय क्षेत्र से लगे करीब दो सौ गांवों में करीब एक लाख से ज्यादा आबादी बस रही है। रोजाना कोई न कोई आगजनी की घटनाएं क्षेत्र में देखने को मिल रही है।

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह ने 18 मार्च 2013 को नगर आगमन पर एक फायर ब्रिगेड सौंपी थी। सार्वजनिक मंच पर पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष सुरेश पाठक और सीएमओ राजेंद्र शर्मा को इस गाड़ी चाबी सौंपी गई थी। यह तीन हजार लीटर की जलभरण क्षमता वाली फायर ब्रिगेड अग्निशमन के सभी संसाधन से लैस है। इसके बाद से आज तक क्षेत्र को एक भी फायरब्रिगेड प्राप्त नहीं हो पाई है। बरेली के अलावा बाड़ी और उदयपुरा तहसील में भी इसी फायरब्रिगेड को पहुंचाकर आगजनी के दौरान मदद ली जा रही है। लगभग 130 से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में यह मात्र एक ही दमकल है जिसे आग लगने की घटनाओं के दौरान पहुंचाया जाता है। जिससे दूरी अधिक होने के कारण दमकल समय पर नहीं पहुंच पाती है। ऐसे में आगजनी से काफी नुकसान हो रहा है। हाल ही में भोंड़िया, भारकच्छ, सोजनी में भी आगजनी की घटनाएं हुई हैं। समय अभाव के चलते उनकी खड़ी फसल को नहीं आग से नहीं बचाया जा सका है। जिससे किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है।

गर्मी में क्षेत्र में रोजाना कोई न कोई आगजनी की घटनाएं क्षेत्र में देखने को मिल रही है
फायर ब्रिगेड की कमी के कारण आगजनी की घटनाओं पर नहीं लग पा रहा अंकुश।

विधानसभा में उठा था मामला
इलाके के जनप्रतिनिधि, मंत्रियों और अधिकारियों को फायर ब्रिगेड के अभाव में होने वाले नुकसान के बारे में बताते रहे हैं। इस बारे में आश्वासन तो मिलते रहे, लेकिन फायर ब्रिगेड नहीं मिली। विस में पूर्व विधायक भगवानसिंह राजपूत द्वारा क्षेत्र में फायर ब्रिगेड उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा कई बार उठाया गया। विधायक ने तात्कालीन नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर से रायसेन जिले की समस्त नगर पंचायतों व नगर परिषदों में आगजनी की घटना से निपटने संबंधी उपाय और संसाधनों की जानकारी मांगी थी। हर साल इलाके में आगजनी की से हुए लाखों के नुकसान का सिर्फ सरकारी आंकलन ही हुआ। खेतों में खड़ी और खलिहान में रखी फसल को सबसे ज्यादा खतरा आग से ही होता है। दूर से आने वाली फायर ब्रिगेड के इंतजार में सब कुछ खाक हो चुका होता है। हर बड़ी आगजनी के बाद फायर ब्रिगेड की मांग उठती रही है।

खेत की नरवाई जलाने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान
खेत की नरवाई जलाने पर कानूनी कार्रवाई भी होती है। अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय से संबंधित किसान को नोटिस जारी किया जाता है। जिसमें डीएम के आदेश का उल्ल्घंन और धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी का उल्लेख होता है। विगत वर्षों में ऐसे कई किसानों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

ग्राम पंचायतों से मिनी फाइटर बनाने की अपील की
वर्तमान में एक फायरब्रिगेड नगर परिषद के पास उपलब्ध है। जिससे पूरे अनुविभाग के सैकड़ों ग्रामीण क्षेत्रों में मदद पहुंचाई जा रही है। दूरी अधिक होने और समय अभाव के चलते कई बार आगजनी से बड़ा नुकसान हो जाता है। हमने इसके लिए मिनी फायर फाइटर बनाए हैं जिससे स्थानीय स्तर पर तत्काल आग पर काबू पाने का काम किया जा रहा है। मिनी फायर फाइटर बनाने के लिए हमने ग्राम पंचायतों से भी अपील की है। गुंजन गिरीष पालीवाल, अध्यक्ष नप बरेली

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