टमाटर के अच्छे दाम नहीं मिले, खेतों में छोड़े मवेशी
क्षेत्र में लगभग 15000 हेक्टेयर से अधिक में टमाटर का उत्पादन किया जाता है, लेकिन इस बार उत्पादन का लाभ किसानों को नहीं मिलने के कारण किसान जहां परेशान हैं। वहीं इस समय स्थिति ऐसी बन चुकी है कि किसानों को टमाटरों को तुड़वाने के लिए मजदूरी निकालना भी मुश्किल हो चुका है। इस कारण अब किसानों ने अपने अपने खेतों में मवेशियों को छोड़ दिया है।
ज्ञातव्य है कि बाड़ी क्षेत्र में सबसे अधिक टमाटरों का उत्पादन किया जाता है। यहां का टमाटर उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, कर्नाटक जाता है। इस बार टमाटर का उत्पादन बढ़ा है। वही किसानों को लगातार इतना नुकसान भी हुआ है। किसानों को गाड़ियों का किराया भी अपने जेब से देना पड़ा है। पिछले वर्षों में ₹250 प्रति कैरेट से ₹400 प्रति कैरेट तक टमाटर बिका। वहीं इस बार टमाटरों के भाव ₹25 कैरेट से अधिकतम ₹50 कैरेट पर रह गए। इससे किसानों की लागत तो दूर तुड़वाने की मजदूरी तक नहीं निकल रही। क्योंकि प्रतिदिन एक मजदूर की मजदूरी 250 से 300 रुपए तक है। इस कारण किसानों ने पहले तो टमाटरों के भाव नहीं मिलने के कारण इन्हें तोड़ कर फेंका ताकि शेष बचे टमाटरों के भाव मिल जाएं। फिर भी दाम नहीं मिले तो मवेशियों को टमाटर खिला दिए।
हालात
50 रुपए प्रति कैरेट टमाटर बिकने के कारण मजदूरी निकालना भी हो रहा है मुश्किल
किसानों ने टमाटर के खेतों में छोड़े मवेशी।
इस साल टमाटर में हुआ घाटा
किसान अनिल जाट बाड़ी का कहना है कि हमारे द्वारा प्रतिवर्ष टमाटरों का उत्पादन किया जाता है, लेकिन इस वर्ष टमाटर के बिल्कुल भी भाव नहीं मिलने के कारण लगातार घाटा लगा है। इस कारण फसलों को जानवरों को खिलाना ही उचित है। अशोक शर्मा कृषक केवलाझिर का कहना है कि केवललाझिर में शुरुआत से ही सबसे अधिक टमाटरों का उत्पादन किया जाता है, लेकिन इस बार किसान उल्टा कर्जे में जा चुका है।