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कार्यशाला में 62 दुग्ध उत्पादकों को दी उत्पाद बढ़ाने की जानकारी

3 वर्ष पहले
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बाड़मेर | दुग्ध उत्पादक सशक्त संगठन बनाकर उन्नत तकनीकी से पशुओं का पालन कर आर्थिक एवं सामाजिक रूप से स्वावलंबी बन सकते है। संगठन में ही शक्ति है। यह बात श्योर संस्था द्वारा केयर्न वेदांता फाउंडेशन के सौजन्य से संचालित डेयरी विकास परियोजना के तहत वाली का गोलिया में आयोजित जन जागरूकता कार्यशाला में बोलते हुए कार्यक्रम प्रबंधक हनुमान राम चौधरी ने कही। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादक डेयरी पर शुद्ध व ताजा दुग्ध देकर दूसरों के लिये प्रमाणिक बनें। चौधरी ने कार्यशाला के उद्देश्य की स्पष्टता करते हुए संस्था, परियोजना के साथ सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए दुग्ध उत्पादकों को अच्छी नस्ल के दुधारू पशुओं का पालन कर अच्छी नस्ल के सांड-पाडे से या कृत्रिम गर्भाधान से पशुओं का गर्भ धारण कराने पर जोर दिया। उन्होंने पशुओं का स्वास्थ्य बनाए रखने के लिये पशुओं की सतत जांच, उपचार, टीकाकरण,डी-वार्मिंग कराकर गंभीर बीमारियाें से मुक्ति दिलाने का आह्वान किया। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन, महत्ता अवधारणा, बैंक ऋण व बैंक लीेकेज के साथ नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्रदान की। सहायक परियोजना समन्वयक मालाराम गोदारा ने कहा कि महिलाओं को डेयरी व्यवसाय में भागीदारी बढाकर परिवार में आय बढ़ानी चाहिए। पर्यवेक्षक सोनाराम चौधरी, सचिव सांवलाराम पुरोहित, मुकनाराम पटेल, दानाराम चौधरी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यशाला में 18 महिलाओं सहित कुल 62 दुग्ध उत्पादकों ने भाग लिया।

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