नगर परिषद के पार्षदों और सभापति के बीच 12 दिन तक चला सियासी ड्रामा के बाद सोमवार शाम को धरना समाप्त हो गया। कांग्रेसी पार्षद अपने ही बोर्ड के खिलाफ शहरी विकास कार्यों सहित कई मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। सोमवार शाम को धरनार्थी पांच पार्षद कलेक्टर को ज्ञापन देने पहुंचे थे। इस दौरान बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन भी पहुंचे, कलेक्टर से कहा कि पार्षदों की मांगों को लेकर नगर परिषद से मध्यस्थता करवाई जाए। इसके बाद कलेक्टर शिवप्रसाद नकाते, आयुक्त पंकज मंगल, विधायक मेवाराम जैन के बीच चली वार्ता और मांगों को लेकर कलेक्टर व आयुक्त के आश्वासन के बाद धरना समाप्त किए जाने की घोषणा की गई। खास बात यह है कि जिसके खिलाफ धरना था और विशेष कर जिन पार्षदों की नाराजगी थी, वो तो न बैठक में आए और न ही ज्यूस पिलाकर धरना तुड़़वाया। ऐसे में 12 दिन बाद बिना किसी ठोस आश्वासन से सियासी ड्रामे का खेल खत्म हो गया है। गौरतलब है कि सभापति व कांग्रेसी पार्षदों के बीच विवाद लंबे समय से चल रहा है। राजनीति के इस खेल में पार्षदों ने शहर की समस्याओं को मुद्दा बनाया और सभापति पर निशाना साधने के लिए धरना शुरू किया। इस बीच भाजपा नेताओं ने भी ज्ञापन देने की रस्म अदायगी पूरी कर ली।
पार्षद बोले सभी मांगे मानी, इसलिए किया धरना खत्म
पार्षद बोले
मांगे मान ली है, इसलिए धरना समाप्त: धरने पर बैठे पार्षद सुरतानसिंह, किशनलाल, जगदीश खत्री, अनिल व्यास, नरेश देव सहारण को आयुक्त पंकज मंगल ने ज्यूस पिलाया और धरना समाप्त करवा दिया। पार्षद बोले कि उनकी सभी 12 मांगों को कलेक्टर की मध्यस्थता के बाद मान लिया गया है। दो घंटे तक कलेक्टर कार्यालय में वार्ता चली। जिन कॉलोनियों का कृषि लेआउट प्लान अप्रूव है, पुरानी आबादी व कच्ची बस्ती में पट्टे जारी किए जाएंगे। पार्षदों की मांग पर विकास कार्य करवाने, नालों की सफाई करवाने सहित कई मांगों को लेकर आश्वास्त किया गया। इसके बाद धरना खत्म कर दिया।
और ये रही वजह
न पार्षदों का साथ मिला, न सभापति झुके: दरअसल धरने को 12 दिन बीत गए, लेकिन धरने पर कम पार्षद ही रहे। इसके अलावा अन्य पार्षदों का साथ नहीं मिला। कांग्रेसी पार्षद भी दो गुटों में बंट गए। कई पार्षद सभापति के पक्ष में रहे। वहीं भाजपा के एक पार्षद को छोड़ बाकी कोई सभापति के खिलाफ चल रहे धरने पर नहीं पहुंचे। इसी वजह से धरने पर बैठे पार्षद अकेले पड़ गए। 12 दिन के बाद भी सभापति, विधायक ने धरनार्थियों से समझाइश तक नहीं की। आखिरकार ज्ञापन देने पहुंचे धरनार्थी पार्षदों को प्रशासन के गोलमाल आश्वासन के बाद धरना समाप्त करना पड़ा। जबकि सभापति के खिलाफ धरना दिया गया था एक बार भी धरनार्थियों से वार्ता के लिए भी नहीं गए।
इधर, सभापति का तर्क
गलत के लिए झुकूंगा नहीं, सही काम के लिए मनाही नहीं : सभापति लूणकरण बोथरा ने बताया कि वो शुरूआत से कह रहे थे कि जो नियमों में होगा, वो करने के लिए तैयार है। विकास के कामों के लिए कभी मनाई नहीं है, लेकिन गलत काम किसी भी सूरत में नहीं करेंगे। जिनके पास पट्टे है उनको एनओसी पहले से ही दी जा रही है। 3 दिन पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करके भी नालों की सफाई, अतिक्रमण हटाने, आवारा पशुओं को पकड़ने के निर्देश दिए गए थे। मैं न तो बैठक में गया और न ही धरने पर। कलेक्टर और आयुक्त के साथ वार्ता के बाद पार्षदों का धरना समाप्त किया गया है।