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नगरपरिषद के कांग्रेस बोर्ड में घमासान तेज, विधायक की चुप्पी और प्रतिपक्ष के मौन पर प्रश्नचिन्ह

3 वर्ष पहले
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नगर परिषद में एक तरफ अपने ही बोर्ड के खिलाफ कांग्रेसी पार्षद धरने पर बैठे है। 11 मांगों पर सभापति को डिबेट करने की चुनौती दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ शुक्रवार को धरनार्थी पार्षदों की मांगों के खिलाफ सभापति ने एक होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और विकास कार्यों के दावे किए। खुद के समर्थन में होटल में कांग्रेस के पार्षदों को भोज दिया। विरोधी पार्षदों ने आरोप लगाया है कि सभापति भोजन की राजनीति कर जनता को गुमराह कर रहे हैं। सभापति को शहर की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं है। सभापति को काम करना नहीं है और झूठ की राजनीति करनी है। विधायक मेवाराम भी पिछले कुछ दिनों से बाड़मेर में है, लेकिन पार्षदों के असंतोष और सभापति से वार्ता नहीं की है। इधर, इस पूरे मामले में भाजपा के पास कांग्रेस बोर्ड को घेरने का पूरा अवसर था,लेकिन सिवाय कलेक्टर को शहर की समस्याओं के ज्ञापन देने के अलावा कुछ नहीं किया है। सभापति के खिलाफ कांग्रेस पार्षदों का आरोप हैं कि प्रतिपक्ष की भूमिका भाजपा नहीं निभा रहा है और भाजपा पार्षद सभापति के साथ हैं।

पार्षद बोले: सभापति के विकास के खोखले दावे

इधर नगर परिषद के बाहर धरने पर बैठे पार्षदों ने बताया कि सभापति विकास के खोखले दावे कर रहे हैं। डिबेट करें तो झूठ बेनकाब हो जाएगा। शहरी जन कल्याण शिविरों में सिर्फ 27 पट्टे दिए। हाईकोर्ट का स्टे बताकर पट्टों का कार्य जबरन रोका गया है। बिजली-पानी की एनओसी नहीं दी जा रही है। सफाई व्यवस्था के बुरे हाल है। स्टेशन रोड से कलेक्टर बंगले तक हर रोज सड़कों पर गंदा पानी बहता है। नालियां कचरे से अटी हुई है। विकास कार्यों में भेदभाव कर 70-80 लाख तो कहीं 5 लाख के कार्य करवा रहे हैं। आवारा पशुओं की समस्या से शहर परेशान है। अतिक्रमण हो रहे है, लेकिन ठेलों वालों को परेशान कर रहे हैं। करोड़ों की जमीन पर अतिक्रमण मुक्त करने के बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। भ्रष्टाचार देखना है तो पुराने रुके हुए पेमेंट किए गए है। एन एफ इंफा को 57 लाख का पेमेंट जारी किया। सभापति स्वयं की कॉलोनी संशय के घेरे में है। बोर्ड की बैठक समय पर नहीं होती है। बैठक का एजेंडा शहर की समस्याओं के हिसाब से नहीं सभापति स्वयं के हिसाब से तय कर रहे हैं। गाडोलिया लौहारों को बसाने और शरणार्थियों को पट्टे देने की कोई योजना नहीं हैं।

अपनी ही पार्टी के बोर्ड में असंतोष, विधायक की चुप्पी क्यों?

निकाय चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिलने पर बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन की पसंद पर ही लूणकरण बोथरा को सभापति चुना गया। एक साल तक विधायक व कांग्रेस नेता भी सभापति के साथ रहे। इसके बाद धीरे-धीरे सभापति व पार्षदों के बीच अनबन के बाद दूरियां बढ़ती गई। कांग्रेस बोर्ड के साढ़े तीन साल के कार्यकाल में कई पार्षद खुलकर विरोध में आ गए। इतना ही नहीं कई बार तो अविश्वास प्रस्ताव को लेकर पार्षद लामबद्ध हुए। नौ दिन से पार्षद धरने पर बैठे हैं। सभापति व पार्षदों की लड़ाई के मुद्दे पर विधायक जैन चुप्पी साधे हुए हैं। इस सियासी जंग में विधायक ने अपना रूख स्पष्ट नहीं किया है। इस वजह से कांग्रेस बोर्ड के बीच उपजा विवाद शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा है।

नौ दिन से धरने पर बैठे कांग्रेसी पार्षदों का आरोप

सभापति सही काम भी नहीं कर रहे हैं, शहर को गुमराह कर रहे हैं

सभापति: साढ़े तीन साल में हर वार्ड में सीसी सड़क बनाई, विकास करवाया

नगर परिषद के बाहर सभापति के खिलाफ चल रहे धरने के नौवें दिन सभापति मीडिया के सामने आए और आंदोलित पार्षदों की मांगों का जवाब दिया। बोले किसी के दबाव में गलत काम नहीं करुंगा, जो काम सही है, उसे कभी नहीं रोकता हूं। बिना भेदभाव हर वार्ड में विकास के काम करवाए है। वार्डों में सीसी व डामर रोड के काम हुए है। साढ़े तीन सालों में 40 वार्डों में 24.51 करोड़ रुपए के विकास कार्य करवाए है, जबकि पार्षद बोल रहे है कि विकास नहीं हो रहा है। छह करोड़ के टेंडर अभी हुए है। जिनके पास पट्टे है, उन्हें एनओसी दी जा रही है। इसके अलावा भी आयुक्त को कहा है कि जिनके पास पट्टे नहीं है, उनके लिए मौका निरीक्षण कर एनओसी दी जाए। सभी वार्डों में सफाई के लिए अभियान चलाया जाएगा। बोथरा ने कहा कि वो जब तक है सरकारी जमीन के लिए लड़ते रहेंगे। नालों की सफाई करवाई जाएगी बोथरा ने नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कहा कि जिन लोगों ने भ्रष्टाचार किया वो जेल गए है और जो अब भी भ्रष्टाचार करेंगे उनके लिए भी जेल तैयार है। गाडोलिया लौहारों को पट्टे दिए जाएंगे। सभापति ने कहा कहा कि बेवजह धरना देकर बोर्ड को बदनाम करने की बजाय धरना खत्म कर शहर के विकास में साथ दें। जनता के बीच जाएं उनकी समस्या सुने और बोर्ड से जनता के लिए काम करवाएं। वो पार्षदों के वार्डों में काम करने काे तैयार है। इस दौरान सभापति के साथ पार्षद बलवीर माली, किशोर शर्मा, सुआ देवी, रुक्मणी देवी, राजू देवी, बांकाराम, पूर्व पार्षद रिड़मलसिंह दांता मौजूद रहे। होटल में इन पार्षदों को भोज भी दिया गया।

प्रतिपक्ष के पास था मौका, भाजपा के पार्षद मौन क्यों?

नगरपरिषद सभापति व कांग्रेसी पार्षदों के बीच विवाद के कारण शहर का विकास ठप है। प्रस्ताव पारित हो रहे हैं न टेंडर जारी। इस स्थिति में विपक्ष मौन साधे हैं। कांग्रेस की आपसी लड़ाई को लेकर भाजपा पार्षद भुना नहीं पा रहे हैं। प्रतिपक्ष नेता मदन चंडक के नेतृत्व में एक भी पार्षद ने अपनी प्रतिक्रिया तक नहीं दी है। भाजपा के एक पार्षद जगदीश खत्री धरने पर है। इतना ही नहीं शहर के विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष की भूमिका में नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि कुछ दिन पूर्व यूआईटी चेयरपर्सन डॉ. प्रियंका चौधरी के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन देकर इतिश्री कर ली। शहर का विकास ठप है और जनता को कदम-कदम पर ठोकरे खानी पड़ रही है। बावजूद इसके विपक्षी खेमा खामोश है।

सियासी मायने क्या

कांग्रेस: सभापति व पार्षदों के बीच छिड़ी सियासी जंग से कांग्रेस नेता दूरी बनाए हैं। क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ कांग्रेस बोर्ड की है। जनता की सहानुभूति बटोरने के लिए विवाद से फायदा नहीं तो नुकसान भी नहीं है।

भाजपा: काम नहीं होने से कांग्रेस से जनता नाराज होने से माहौल बनेगा। भाजपा को उम्मीद है कि इसका उन्हें भविष्य में फायदा मिलेगा।

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