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जो क्षत्रिय राजनीति करते हैं, वो राष्ट्र भक्त नहीं, बल्कि पार्टी भक्त है : रोलसाहबसर

3 वर्ष पहले
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जो क्षत्रिय नेता राजनीति करते हैं, वे राष्ट्र भक्त नहीं, पार्टी के भक्त हैं। स्वार्थ के लिए ऐसा करते हैं। क्षत्रिय युवक संघ के संघ प्रमुख भगवानसिंह रोलसाहबसर शनिवार को शहर के गेहूं रोड पर आयोजित उच्च प्रशिक्षण शिविर के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह बात कहीं। उन्हाेंने कहा कि राष्ट्र भक्त अब बहुत कम क्या गिनने लायक रहे हैं। मुसलमान और अंग्रेजी शासन के दौरान तो स्थिति काफी ठीक थी। लेकिन देश की आजादी के बाद स्थिति ऐसी बनी कि क्षत्रिय संभालने के लायक नहीं रहे। तब तनसिंह ने ऐसी कल्पना की थी, जिसके बाद ऐसे शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि क्षत्रियों में संस्कारों का संचय किया जाए। क्षत्रियों का जीवन हमेशा राष्ट्र की रक्षा से जुड़ा रहा है और रहेगा। छोटे बच्चों से लेकर युवाओं और दंपतियों के लिए ऐसे शिविर लगाते हैं, इन्हीं शिविरों में से एक ये ग्रीष्मकालीन शिविर है। 11 दिवसीय शिविर है, जिसका समापन सोमवार को होगा। उन्होंने वर्तमान राजनीति में बढ़ रही धार्मिक कट्टरता पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि धार्मिक कट्टरता देश को जोड़ती नहीं, बल्कि तोड़ती है, जो बेहद खतरनाक है। धार्मिक कट्टरता कभी भी नहीं होनी चाहिए। उन्हाेंने क्षत्रिय की परिभाषा बताते हुए कहा कि शौर्य, धर्म व कर्म के ऊपर क्षत्रिय पहचाना जाता है। जो ऐसा नहीं करते हैं, उन्हें राजपूत तो कह सकते हैं, लेकिन क्षत्रिय नहीं कह सकते हैं। क्षत्रिय दुष्टों से रक्षा करता है। इतिहास गवाह है कि क्षत्रिय रक्षा के लिए मर मिटते थे और मिटते हैं। उन्होंने शिविर के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस शिविर में करीब 570 के लगभग स्वयंसेवक भाग लेे रहे हैं, जिसमें गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश व अधिकांश राजस्थान के स्वयंसेवक हैं।

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