जिले को प्लास्टिक फ्री जोन बनाने के लिए प्रशासन ने मुहिम का आगाज किया है। आलू व मक्की के स्टार्च से बने कैरी बैग से जिले को प्लास्टिक से प्रदूषण से मुक्त किया जाएगा। अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो एक साल के भीतर जिला पूर्ण तौर पर प्लास्टिक फ्री जोन बन जाएगा। प्रदेश भर में मुंबई व दिल्ली की 6 बड़ी कंपनियां इस लिफाफे की सप्लाई करेंगी। यह लिफाफे सरकार द्वारा प्रमाणित हैं।
लिफाफों की दुकानों पर ये लिफाफे बिकने के लिए आ गए हैं। यह लिफाफे 6 महीने के भीतर ही गल जाते हैं, जिससे प्रदूषण नहीं फैलेगा। नगर कौंसिल की तरफ से शहर के 31 बोर्डों में हर रोज सफाई करके 40 ट्राली के करीब कचरा निकाला जाता है। इस कचरे में लगभग आधा प्लास्टिक होता है। जो शहर को हर रोज गंदगी के ढेर में बदल रहा है। प्लास्टिक कई सालों तक नहीं गलता। एक्सपर्ट के अनुसार इन लिफाफों से पहले सरकार द्वारा प्रमाणित हाई डेनसिटी (एचडी) लिफाफे भी गलने में 3-4 साल का समय लेते है, लेकिन सरकार द्वारा नए सिरे से प्रमाणित लिफाफे 4 से 6 महीने में गल जाते है।
प्लास्टिक के लिफाफों की वजह से शहर में हर साल बरसाती नाला जाम होता है। पक्का कॉलेज रोड से बाजाखाना रोड तक जाने वाले बरसाती नाले की सफाई पर नगर कौंसिल की तरफ से हर साल 10 लाख रुपए के करीब बरसात आने से पहले सफाई पर ही खर्च किए जाते हैं। इसमें गंदगी अटकने के मुख्य कारण प्लास्टिक के लिफाफे हैं। अगर इन लिफाफों की जगह नए लिफाफे इस्तेमाल हों तो गंदगी नहीं बढ़ेंगी।
लिफाफे एक से ज्यादा बार भी प्रयोग कर सकते हैं
जो नए लिफाफे विभाग की तरफ से जारी किए गए हैं वह पुराने प्लास्टिक के लिफाफों की तरह वातावरण को दूषित नहीं करते। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के एक्सईएन हरजीत सिंह ने कहा कि ये लिफाफा 4 से 6 महीने के भीतर गल जाएगा। यह लिफाफा दूसरे लिफाफों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका एक बार प्रयोग करके इसे फिर से भी प्रयोग में लिया जा सकता है। ना तो इससे प्रदूषण फैलता है और ना ही इस लिफाफे से किसी को कोई नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को इस संबंधित विभाग की तरफ से प्रेरित किया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन के साथ मिल कर सेमिनारों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही पर्चे बांटकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।
प्लास्टिक लिफाफे के रेट 150 रुपये किलो : हरजीत
एक्सईएन प्रदूषण बोर्ड हरजीत सिंह ने कहा कि जो नए लिफाफे डीसी धर्मपाल गुप्ता व अन्य अधिकारियों ने जारी किए हैं इनका रेट 400 रुपए किलो है, जबकि दूसरे लिफाफे का रेट 150 रुपए किलो है, लेकिन फिर भी वह लोगों को इन लिफाफे के इस्तेमाल के लिए जागरूक करेंगे। इनका रेट पुराने लिफाफे के लेवल पर करने के लिए प्रयास करेंगे।