ट्रैक्टर-ट्राॅलियों से गेहूं की ढुलाई के फैसले पर भड़के ट्रक ऑपरेटर्स
बरनाला में पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ट्रक ऑपरेटर्स।
सरकार को फैसला वापस लेना चाहिए : तेजा सिंह
भास्कर संवाददाता| बरनाला
ट्रैक्टर-ट्राॅलियों से गेहूं की ढुलाई के विरोध में भड़के ट्रक आॅपरेटरों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। ट्रक आॅपरेटर तेजा सिंह ने कहा कि सरकार को तुरंत फैसला वापस लेना चाहिए। पिछले कई सालों से ट्रकों से ही गेहूं को मंडियों से गोदाम तक पहुंचाया जाता रहा है, लेकिन नई पाॅलिसी के तहत अब यह काम ट्रैक्टर से होगा, जोकि सरासर गलत है।
उन्होंने कहा कि सरकार ट्रक आॅपरेटरों से 5 वर्ष के लिए लोकल स्टेट परमिट देने के ऐवज में 3000 रुपए के करीब वसूलती है। ट्रक ऑपरेटरों को गाड़ी पासिंग फिटनेस 3000 रुपए प्रति वर्ष देना होता है। क्वार्टर टैक्स जो तीन महीनों के लिए 6 टायरों गाड़ी का 2375 रुपए क्वार्टर और 9500 रुपए वार्षिक के रूप में सरकार द्वारा वसूला जाता है। जो पहले 7000 रुपए प्रति वार्षिक थी। 10 टायरों वाली गाड़ी का 15000 रुपए वार्षिक ट्रक ऑपरेटरों से सरकार वसूलती है। 12 और 18 टायरों वाली गाड़ी का 22000 रुपए सरकार ट्रक ऑपरेटर से हर वर्ष वसूलती है जो पहले 18000 रुपए वार्षिक होती थी। कैप्टन सरकार ने यूनियनें भंग कर टैक्सों में भारी वृद्धि कर दी है। टोल टैक्स अलग से देने पड़ते है। ओवरलोड ट्रक के चालान काट कर 25000 से 30000 रुपए जुर्माना ट्रक ऑपरेटर से वसूला जाता है।
ट्रैक्टर-ट्राॅली जो व्यापारिक वाहन में नहीं आती इसको सभी सुविधाएं केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा मुहैया करवाई जाती है। जो सरकार के लिए कोई कमाई का साधन भी नहीं है आैर न ही ट्रैक्टर ट्राॅलियों के ओवरलोड का चालान काटा जाता है। सरकार ट्रक आप्रेटरों से भारी टैक्स के रूप में रेवेन्यू एकत्रित कर उनके साथ धक्का कर रही है। इस मौके पर उन्होंने प्रदेश सरकार के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। (दीपक गर्ग)